पूर्व सीएम अखिलेश यादव का तिलक लगाकर स्वागत करते योगी सत्यम।
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क्रियायोग आश्रम के पावन वटवृक्ष के नीचे परमहंस योगानंद के चित्र के सामने दीपक जलाकर उन्होंने प्रार्थना भी की। इस दौरान क्रियायोग वैज्ञानिक स्वामी योगी सत्यम ने ज्ञानावतार लाहिड़ी महाशय की ज्ञान निधि से देश -विदेश के अनुयायियों को परिचित कराया। कहा कि सत्य, अहिंसा और प्रेम का अभ्युदय सिर्फ क्रियायोग अभ्यास से संभव है।
क्रिया योग आश्रम में विदेशी योग साधकों से मिलते पूर्व सीएम अखिलेश यादव।
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स्वामी योगी सत्यम ने बताया कि सात मार्च 1952 को लॉस एंजेलिस के बिल्टमोर होटल में आयोजित प्रतिभोज में 50 देशों के राजदूतों के समक्ष परमहंस योगानंद ने भारत के नाम अपना संदेश देते हुए महासमाधि में प्रवेश किया था। महासमाधि के उपरांत 20 दिन तक उनके शरीर में किसी प्रकार का विकार नहीं आया था।
"परमहंस योगानंद के पार्थिव शरीर में किसी भी प्रकार के विकारों का न आना दुनिया के लिए अत्यंत असाधारण अनुभव रहा है। न तो उनकी त्वचा के रंग में किसी प्रकार का परिवर्तन हुआ था, न शरीर तंतुओं में शुष्कता ही आई थी।