ईस्ट इंडिया कंपनी मिला था मुफ्त व्यापार का अधिकार
संधि के साथ ही ईस्ट इंडिया कंपनी को अवध में कर मुफ्त व्यापार करने का अधिकार प्राप्त हो गया था। इसके बाद अंग्रेजों ने राय साहब की उपाधि से विभूषित जगत नारायण चड्ढा के नाम पर पुराने शहर के मुख्य मार्ग का नामकरण कर दिया। जगत नारायण चड्ढा की कोठी तब सौ एकड़ क्षेत्रफल में थी।
डॉ. संतोष खन्ना तोसी बताते हैं कि मौजूदा गोल पार्क से लेकर अतरसुइया में कल्याणी देवी मंदिर के आगे खत्री पाठशाला तक जगदीश बाग और भगवत बाग उन्हीं के बसाए हुए थे। इसी क्षेत्र में तब पंजाब से आए खत्रियों के सैनिक परिवार बस गए। अब चड्ढा जी की कोठी वाले इलाके में पांच सौ से अधिक परिवारों के घर आबाद हैं।
पुरानी गलियों और मोहल्लों पर अध्ययन करने वाले कुंवर जी टंडन बताते हैं कि जगतनारायण चड्ढा के पुत्र धनवंत नारायण चड्ढा भी शहर में खूब लोकप्रिय हुए थे। वह बताते हैं कि इलाहाबाद की दूसरी संधि के बाद ही अंग्रेजों ने अतरसुइया जाने वाली गली के प्रवेश द्वार पर चड्ढा जी की गली वाला पत्थर लगाया गया था।