चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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28916 पुलिस आरक्षियों की सीधी भर्ती के मामले में हाईकोर्ट ने कहा है कि जाति प्रमाणपत्र जारी करने की कट ऑफ डेट समाप्त हो जाने के बाद बने प्रमाणपत्र भी मान्य होंगे। कोर्ट ने याची की वार्षिक आमदनी के आधार पर माना कि वह क्रीमी लेयर में नहीं आता है, इसलिए उसको ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ दिया जाए। प्रवेश कुमार की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति एके गुप्ता की पीठ ने यह आदेश दिया।
इससे पूर्व एकल पीठ ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि याची विज्ञापन की शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य है। फैसले को विशेष अपील में चुनौती दी गई। अपीलार्थी के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची ने 29 दिसंबर 2015 के विज्ञापन के तहत 28916 सिपाही भर्ती के लिए आवेदन किया था। भर्ती शैक्षणिक गुणांक और शारीरिक दक्षता परीक्षा के आधार पर होनी थी। दोनों चरणों में सफल होने के बाद उसे दस्तावेजों के सत्यापन हेतु बुलाया गया। सत्यापन में उसे यह कहते हुए नियुक्ति देने से इंकार कर दिया गया कि उसका ओबीसी का प्रमाणपत्र कट ऑफ डेट के बाद निर्गत किया गया है। विज्ञापन में कट ऑफ डेट एक अप्रैल 2015 से 17 फरवरी 2016 निर्धारित की गई थी। जबकि याची का प्रमाणपत्र 17 फरवरी 2016 के बाद बना था।
कोर्ट ने कहा कि याची का जाति प्रमाणपत्र कट ऑफ डेट के बाद का है, मगर उसकी तीन वर्षों की पारिवारिक आय आठ लाख से कम है। इसका अर्थ है कि वह क्रीमी लेयर में नहीं आता है। सुप्रीमकोर्ट ने भी अपने निर्णय में कहा है कि कट ऑफ डेट के बाद बना जाति प्रमाणपत्र भी मान्य होगा। कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि कोई दूसरा कारण न हो तो याची की नियुक्ति पर तीन माह में निर्णय लिया जाए।