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डाला छठ 2021 : संगम समेत गंगा-यमुना के तटों पर बनीं कामना की वेदियां, सूर्योपासना सोमवार से

Sun, 07 Nov 2021 06:30 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
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Prayagraj News : डाला छठ के मद्देनजर संगम तट पर साफ सफाई का काम शुरू हो गया है। - फोटो : प्रयागराज
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पुत्र कामना, आरोग्य और सर्व मंगल के लिए चार दिवसीय सूर्योपासना का डाला षष्ठी व्रत सोमवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा। सूर्योपासना के लिए संगम से लेकर गंगा, यमुना के अन्य तटों पर वेदियां बनाने के साथ ही अर्घ्य देने के लिए व्रतियों के परिजनों ने अपनी जगह पक्की कर ली है। 10 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा।

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कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पष्ठी तिथि को डाला छठ के लोक पर्व का प्रथम अर्घ्य देने के लिए गंगा-यमुना के तटों को सजा दिया गया है। संगम पर व्रतियों के अर्घ्य के लिए घाट बनाने के साथ ही प्रकाश की व्यवस्था करा ली गई है। सोमवार को नहाय-खाय से इस व्रत की शुरुआत होगी। वेदियों पर व्रती महिलाएं दीप जलाकर अपनी मनौतियों के लिए संकल्प लेंगी। घरों में डाला षष्ठी की आराधना की गीत गाए जाने लगे हैं।

रविवार की सुबह से ही घाटों पर वेदियां बनाने और अर्घ्य के लिए जगह सुरक्षित करने का सिलसिला आरंभ हो गया। संगम के अलावा वीआईपी घाट, रामघाट, दशाश्वमेध घाट, अरैल समेत अन्य तटों पर व्रतियों के परिजनों ने वेदियां बनाकर उस पर अपना नाम लिखकर पूजा की। वेदी स्थल को मिट्टी का घेरा बनाकर पैक किया जाता रहा, ताकि दूसरे लोग वहां अपनी वेदी न बना सकें।

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Prayagraj News : संगम तट पर डाला छठ के मद्देनजर घाट की तैयारी जोरों पर है। - फोटो : प्रयागराज
खरना के बाद शुरू होगा निर्जला व्रत
नौ नवंबर को खरना के बाद निर्जला व्रत शुरू होगा। इसी के साथ लगातार 24 घंटे तक निर्जला व्रत रखकर 10 नवंबर की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को छठ का पहला अर्घ्य दिया जाएगा। इसके लिए व्रती महिलाएं सज धज कर डेलिया में डाला षष्ठी का अखंड दीप जलाकर घरों से बाजे गाजे के साथ निकलेंगी। बांस की डेलिया में पूजा का सामान और मंडप के लिए गन्ने का तना लेकर परिजन घाटों पर पहुंचेंगे। वहां वेदियों पर दीप जलाकर डाला षष्ठी की पूजा की जाएगी। इसके बाद डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 11 नवंबर की सुबह सूर्योदय के समय अर्घ्य देकर उपवास का पारण किया जाएगा।

कार्तिक मास में सूर्य अपनी नीच राशि में होता है। इसलिए सूर्य देव की विशेष उपासना करने की परंपरा रही है,ताकि रोग-दुख का शमन हो सके। खास तौर से संतान की प्राप्ति और दीर्घायु की कामना के लिए भी महिलाएं इस व्रत को धारण करती हैं। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र। 
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Prayagraj News : डाला छठ के मद्देनजर संगम तट पर साफ सफाई का काम शुरू हो गया है। - फोटो : प्रयागराज
मेला प्राधिकरण की ओर से घाटों पर किए गए इंतजाम
डाला षष्ठी व्रत के लिए प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से संगम तक पर इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए संगम तक चकर्ड प्लेटमार्गों के अलावा स्नान घाटों का भी निर्माण कराया गया है। इसके अलावा प्रकाश की भी व्यवस्था कराई गई है, ताकि वेदियों पर रात्रि जागरण करने वाली व्रतियों और उनके परिजनों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

पहले दिन लौकी-चावल का व्रती महिलाएं ग्रहण करेंगी आहार
पहले दिन लौकी और चावल का आहार ग्रहण किया जाएगी। दूसरे दिन नौ नवंबर को खरना होगा। इस दिन वेदियों पर दीप जलाए जाएंगे। साथ ही व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को खीर का सेवन करेंगी। तीसरे दिन उपवास रखकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसमें विशेष प्रकार का पकवान ठेकुवा और मौसमी फल षष्ठी माता को अर्पित किए जाएंगे।
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