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‘ऑनर किलिंग’ के सात आरोपियों की फांसी माफ

Sun, 14 Jul 2013 05:30 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। पुलिस की चलताऊ कार्यप्रणाली, सतही विवेचना का लाभ पाकर ऑनर किलिंग के सात आरोपी जेल की सलाखों से बाहर आने में कामयाब हो गए। हाईकोर्ट ने बदायूं जिले के गुन्नौर थानाक्षेत्र में प्रेमी युगल को टुकड़ों में काटकर जला देने की घटना के सात अभियुक्तों की फांसी की सजा माफ कर दी है। अभियुक्तों की अपील पर फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति अमर सरन और न्यायमूर्ति पंकज नकवी की खंडपीठ ने कहा कि ऑनर किलिंग जैसे मामलों में पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। लचर विवेचना के कारण ऐसे महत्वपूर्ण केस में साक्ष्य नष्ट हो जाते हैं जो अभियुक्त को सजा दिला सकते हैं।
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गुन्नौर थानाक्षेत्र में 22/23 मई 2006 को प्रेमी युगल दीनदयाल और अनीता की बर्बरता पूर्वक हत्या कर दी गई थी। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 30 जुलाई 2012 को अनीता के पिता नत्थू, चचेरे भाईयों राकेश, महाबीर, वीरेश, जयप्रकाश, पप्पू और गुलाब सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी। सभी पर 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया था। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने फांसी की सजा पर रिफरेंस और अपील दोनों की एक साथ सुनवाई की। खंडपीठ ने अपील पर विचारण करते हुए पाया कि अभियोजन ऑनर किलिंग का आरोप संदेह से रहित साबित कर पाने में नाकाम रहा है। विवेचना और साक्ष्यों के संकलन में हद दर्जे की लापरवाही बरती गई। पुलिस ने घटना के छह दिन बाद 29 मई को प्राथमिकी दर्ज की। अगले दिन ही फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई वह भी किसी सीनियर अफसर की अनुमति के बिना। पुन: विवेचना के लिए प्रार्थनापत्र दस महीने बाद मिलने पर अग्रिम विवेचना शुरू की गई। जांच अधिकारी घटनास्थल पर दस महीने बाद पहुंचा।
ट्रायल कोर्ट ने अभियुक्त नत्थू के बयान मात्र को आधार बनाकर शेष छह अभियुक्तों को सजा सुनाई। बयान को तात्विक साक्ष्य नहीं माना जा सकता है। नत्थू ने एक भिन्न कहानी गढ़ी। बचाव पक्ष के साक्षी नत्थू की पत्नी के बयान की प्रतिपरीक्षा करने का अवसर भी शेष अभियुक्तोें को नहीं दिया गया। खंडपीठ ने इन आधारों पर पाया कि मौजूदा साक्ष्यों से अभियुक्तों को संदेह का लाभ मिलता है। अपील को स्वीकार करते हुए फांसी की सजा माफ कर दी गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि अभियुक्तगण किसी अन्य अपराध में वांछित नहीं हैं तो उनको रिहा किया जाए।
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अपील पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने ऑनर किलिंग को सामाजिक विकृति करार दिया है। फैसले में कहा है कि समाज के कुछ वर्गों में ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं इसकी भर्त्सना की जानी चाहिए। यह खतरनाक प्रवृत्ति है। इस विकृति को समाप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों को पहल करनी होगी। विशेषकर पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इस केस के अनुभव से हम कहना चाहेंगे कि ऑनर किलिंग के मामले में पुलिस एसपी स्तर के अधिकारी की अनुमति के बिना फाइनल रिपोर्ट न लगाए। डीजीपी इस संबंध में उचित निर्देश जारी करें जिसका अधीनस्थ अधिकारी सही भावना से पालन करें।
ऑनर किलिंग की बर्बर वारदात के मुख्य अभियुक्त मृतका अनीता के पिता नत्थू ने घटना की पूरी कहानी बदल दी। उसने अपने बयान में कहा कि अनीता की शादी तय थी। 22 मई 2006 की रात राकेश, महाबीर, वीरेश, जयप्रकाश, पप्पू और गुलाब सिंह जो उसके भतीजे हैं असलहे लेकर घर में घुस आए। शादी का सारा सामान और 2100 रुपये लूट लिए। उसका और अनीता का अपहरण कर लिया। खेत में ले गए जहां दीनदयाल मौजूद था। उसके सामने ही उन लोगों ने अनीता और दीनदयाल को टुकड़ों में काटने के बाद जला दिया। ट्रायल कोर्ट ने नत्थू के इस बयान को सजा का आधार बनाया।
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