एनडीपीएस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश भारत सिंह यादव की कोर्ट ने पुलिस आयुक्त प्रयागराज को पत्र लिख कर सुबूत पेश करने को कहा, लेकिन पांच महीने में कोई जवाब नहीं मिला। इसके पहले कोर्ट को बताया गया कि बरामद गांजा मालखाने में रखरखाव के समुचित इंतजाम न होने के कारण सड़कर नष्ट हो गया है। कोर्ट ने सुबूतों-गवाहों के अभाव में चार आरोपियों को बरी कर दिया। दो फरार हैं। कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा...
मौजूदा हालात में इस संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता कि प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस मामले में पुलिस द्वारा अभियुक्तों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। यह हैरानी की बात है कि बरामद 7.80 क्विंटल गांजा में से एक ग्राम भी कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका।
एक गवाही उसमें भी छेद ही छेद
अभियोजन की ओर से पेश एकमात्र गवाह प्रभारी निरीक्षक कुशल पाल यादव की गवाही में भी ढेरों छेद थे। गवाही में बताया कि गांजे की तौल कांस्टेबल जितेंद्र कुमार द्वारा लाई गई तराजू से की गई थी। लेकिन, जिरह में वह यह नहीं बता सके कि तराजू आई कहां से थी, वह तराजू अब कहां है। वारदात के दौरान बरामद मिनी ट्रक, ऑल्टो कार और स्कूटी किसकी थी और ये वाहन कहां हैं, इसका भी वह कोई जवाब नहीं दे सके।