यहीं पर उसकी दोस्ती शोएब, यासिर और मकसूद उर्फ जैद से हुई थी। चारों जब जरायम की दुनिया में उतरे तो एक गैंग बनाकर काम करने लगे। अबरार और अख्तर कटरा भी बाद में दोस्त बन गए थे। बंसल ने आलोक सिन्हा को जालसाजी में नैनी जेल भिजवाया तो जेल में उसकी दिलीप मिश्रा और अख्तर कटरा से दोस्ती हो गई। आलोक ने दिलीप और अख्तर कटरा से बंसल की हत्या कराने की बात कही। अख्तर कटरा ने ही प्रतापगढ़ के अबरार का नाम बताया था कि उसके पास कई शार्प शूटर हैं।
इंस्पेक्टर एसटीएफ हेमंत भूषण सिंह ने बताया कि अबरार को नैनी जेल में बुलवाकर हत्या का ठेका दिया गया। 55 लाख रुपये में बंसल की हत्या की सुपारी दी गई। अबरार ने इस काम के लिए मकसूद, यासिर और शोएब को तैयार किया। हत्या से पहले आलोक ने 15 लाख रुपये, दो पिस्टल और एक बाइक मुहैया कराई। 12 जनवरी 2017 को तीनों बाइक से जीवन ज्योति हास्पिटल पहुंचे। मकसूद बाहर खड़ा था। यासिर और शोएब ने अंदर जाकर बंसल पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर हत्या दी। अबरार तीनों शूटरों और आलोक सिन्हा के लगातार संपर्क में था। अप्रैल में शूटर शोएब के पकड़े जाने के बाद अबरार पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।