सिंध प्रांत के जरवार गांव के श्रद्धालु ओमप्रकाश ने अमर उजाला को बताया कि जब पाकिस्तान से निकले थे तब मन में यह खुशी थी कि रामलला के दर्शन मिलेंगे, लेकिन उनके दर्शन नसीब नहीं हो सके। सिंध प्रांत के ही अजीत खत्री भी दुखी थे, कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बारे में सुना था। जब इस तीर्थयात्रा में शामिल होने का मौका मिला और पता चला कि यात्रा का एक पड़ाव अयोध्या भी होगा तब बेहद खुशी हुई थी, लेकिन इच्छा अधूरी रह गई। सागर कुमार ने कहा कि पासपोर्ट व वीजा की प्रक्रिया काफी जटिल है। एक छोटी सी चूक के चलते हम सभी श्रद्धालु अयोध्या नहीं जा सके। यहां खुफिया विभाग की जांच में एक श्रद्धालु के वीजा में गड़बड़ी की बात सामने आई थी।