कोरोना वायरस संक्रमण काल में शासन के आदेश मिलने के बाद गत मई महीने में पैरोल पर छोड़े गए सिद्धदोष बंदियों की जेल में वापसी का फरमान आ चुका है। 21 नवंबर से 23 नवंबर के बीच में जेल में आमद कराने की समयावधि सोमवार को को पूरी जरूरी हो गई लेकिन अब तक पैरोल पर रिहा हुए कुल 37 सिद्धदोष बंदियों में से महज दस ने ही आमद कराई है।
एक बंदी अन्य मुकदमे में फिर से जेल आ चुका है। इस तरह पैरोल पर रिहा 27 बंदियों की जेल में वापसी का इंतजार है। हालांकि जेल प्रशासन की ओर से सभी पैरोल पर रिहा बंदियों को सूचित किया जा चुका है। निर्धारित समयावधि में जिन कैदियों ने आमद नहीं कराई, उनके खिलाफ फरारी और हाजिरी के लिए संबंधित जिलों के एसपी, एसएसपी और मजिस्ट्रेट को पत्र भेजकर इनकी हाजिरी सुनिश्चित कराने को कहा गया है।
कोरोना संक्रमण के दौरान संभावित सात साल तक की सजा वाली धाराओं में जेल में बंद विचाराधीन 442 बंदियों को न्यायालय के जरिये मई से लेकर जुलाई के मध्य में जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया था। मार्च-अप्रैल में आठ सप्ताह के लिए 39 ऐसे कैदियों को पैरोल पर शासन के आदेश पर रिहा किया गया था, जिन्हें सात से 10 साल तक की सजा हुई थी।
इनमें से एक कैदी ऐसा था, जिसने मई में रिहाई के समय ही पैरोल लेने से मना कर दिया था, क्योंकि उसकी सजा के कुछ ही दिन बचे थे। बाकी 38 सिद्धदोष बंदियों को पैरोल पर रिहा किया गया था। जिनमें से एक कैदी पिछले दिनों एक अन्य मामले में गिरफ्तार होकर जेल आ गया। इसलिए पैरोल पर बाहर रहने वाले कैदियों की संख्या 37 रह गई।
कोरोना संक्रमण जैसे-जैसे बढ़ा इन कैदियों की पैरोल भी बढ़ती गई। दो बार आठ-आठ हफ्ते की पैरोल बढ़ी। 20 नवंबर को शासन से आदेश आया कि पैरोल पर रिहा बंदियों को तीन दिन के अंदर वापस जेल लाया जाए। इसके बाद जेल प्रशासन की ओर से सभी 37 कैदियों को फोन व अन्य संशाधनों के जरिये सूचित करके 21 से 23 नवंबर के बीच जेल में आमद कराने को कहा था, लेकिन पैरोल पर रिहा कैदियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है।
जिसका नतीजा यह है कि तीन दिन की तय समयावधि बीतने के बाद मात्र दस कैदियों ने ही अब तक जेल में आमद कराई। 27 बंदी जेल से बाहर हैं। जिनकों वापस लाने के लिए जेल प्रशासन पुलिस के जरिए उनकी हाजिरी सुनिश्चित कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जमानत पर रिहा 442 विचाराधीन बंदियों की जमानत अभी एक दिसंबर तक है। इसलिए अभी उनकी वापसी की तैयारी नहीं है।
किसी के बेटे-बेटी की पड़ी है शादी तो कोई अन्य समस्याओं में है घिरा
पैरोल पर रिहा होने वाले सिद्धदोष बंदियों के जेल में वापसी में देरी की अपनी अलग वजह है। इनमें से किसी के बेट-बेटी की शादी एकाध हफ्ते के अंदर होने वाली है तो, किसी के सामने पत्नी, माता-पिता या बच्चों की बीमारी समेत अन्य समस्याएं खड़ी हैं। नैनी सेंट्रल जेल से पैरोल पर बाहर जाने वाले 37 सिद्धदोष बंदियों में 22 बंदी अकेले प्रयागराज के विभिन्न इलाकों के रहने वाले हैं।
इनके अलावा चित्रकूटक, बांदा, कौशांबी, फतेहपुर एवं प्रतापगढ़ के बंदी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार इन कैदियों को जब जेल से फोन करके या अन्य सूचना के माध्यम से वापस बुलाया गया तो इनमें से कइयों ने बताया कि उन लशोगों ने अपनी बेटी अथवा बेटी की शादी तय कर ली है, जो एकाध हफ्ते में होने वाली है। इसलिए वह जेल वापस नहीं आ रहे हैं। तीन-चार कैदियों के घर में कुछ अन्य समस्याएं हैं। इसलिए उन लोगों ने अपनी आमद नहीं कराई। हालांकि इन बंदियों को अब पुलिस के जरिए वापस जेल लाया जाएगा।
- 20 नवंबर का शासनादेश था, जिसमें पैरोल पर रिहा सभी बंदियों को वापस जेल बुलाया गया था। इनमें से 27 सिद्धदोष बंदी ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक सरेंडर नहीं किया है। इनकी हाजिरी के लिए वरिष्ठ जेल अधीक्षक नैनी की तरफ से संबंधित जिलों के पुलिस कप्तान और मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर पैरोल पर रिहा इन बंदियों की हाजिरी सुनिश्चित कराने को कहा गया है। -बीआर वर्मा, उपमहानिरीक्षक, कारागार नैनी, प्रयागराज परिक्षेत्र।