प्रतियोगियों को पीसीएस-2017 के नोटिफिकेशन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। प्रतियोगियों के हित को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग 2017 से ही सिविल सर्विसेज की तर्ज पर पीसीएस कराने की तैयारी में है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है लेकिन आचार संहिता लागू होने की वजह से यह लंबित हो गया है।
आयोग की ओर से जारी वार्षिक कैलेंडर के अनुसार पीसीएस-2017 प्रारंभिक परीक्षा 19 मार्च को प्रस्तावित है। मुख्य परीक्षा भी 17 जुलाई से संभावित है। इस लिहाज से पीसीएस के लिए जनवरी में ही विज्ञापन जारी हो जाना चाहिए लेकिन इस बार प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद ही नोटिफिकेशन की उम्मीद है। जानकारों तथा अफसरों का कहना है कि आयोग आचार संहिता के दायरे में नहीं आता। इसलिए आयोग के कार्य पर चुनाव आचार संहिता का प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन पीसीएस के नए प्रारूप पर सरकार को निर्णय लेना है।
ऐसे में आयोग के पास दो विकल्प हैं। आयोग पुराने पैटर्न पर ही पीसीएस-2017 कराए या नया सिविल सर्विसेज का पैटर्न लागू करने के लिए नई सरकार के गठन का इंतजार करे। हालांकि अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है लेकिन अफसर स्वीकार कर रहे हैं कि पीसीएस में सिविल सर्विसेज का प्रारूप लागू करना आयोग की प्राथमिकता में है। ऐसे में नोटिफिकेशन के लिए नए सरकार के गठन का इंतजार करना पड़ सकता है। चेयरमैन अनुरूद्ध यादव का कहना है कि एक ही तरह की भर्ती के लिए दो परीक्षा प्रारूप उचित नहीं है। इसलिए पीसीएस में बदलाव आयोग की प्राथमिकता में है। आचार संहिता लागू होने के बाद उपजी स्थिति के मद्देनजर विचार कर आगे निर्णय लिया जाएगा।
सिविल सर्विसेज के नए प्रारूप के अनुसार मुख्य परीक्षा में दो की जगह एक वैकल्पिक विषय हो गया है। इसकी जगह सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों की संख्या बढ़ा दी गई है। इसके विपरीत पीसीएस मुख्य परीक्षा में अब भी दो वैकल्पिक विषय हैं। इसके अलावा सिलेबस तथा पेपर के स्टैंडर्ड में भी भिन्नता है। ऐसे में प्रतियोगियों को दोनों भर्तियों के लिए अलग-अलग तैयारी करनी होती है। जबकि, कई राज्यों में सिविल सर्विसेज की तर्ज पर पीसीएस में बदलाव कर लिया गया है। सिविल सर्विसेज में यहां के प्रतियोगियों की असफलता के लिए इसे बड़ा कारण माना जाता है। ऐसे में प्रतियोगी लगातार पीसीएस में सिविल सर्विसेज की तर्ज पर बदलाव की मांग कर रहे हैं। आयोग के अफसरों का भी मानना है कि पुराने पैटर्न पर पीसीएस कराना यहां के प्रतियोगियों के साथ न्याय नहीं है। इसलिए पीसीएस के पैटर्न में बदलाव आयोग की प्राथमिकता में है।