प्रेम व रमेश चंद्र ने उठाई मांग। संवाद
यमुना एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार में दौड़ते वाहनों से आए दिन होने वाले भीषण हादसों ने इस मार्ग को डेथ जोन में बदल दिया है। हादसों में घायलों को फौरी इलाज न मिलने के कारण यात्री दम तोड़ देते हैं।
ऐसे में टप्पल क्षेत्र में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 100 बेड का ट्रामा सेंटर स्थापित कराने की मांग जोर पकड़ने लगी है ताकि दुर्घटना का शिकार होने वाले लोगों को ''गोल्डन ऑवर'' (हादसे के बाद का पहले जीवन रक्षक घंटे) में स्थानीय स्तर पर ही इलाज मुहैया हो सके।
राष्ट्रीय किसान मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ.रमेश कुमार अत्री और जट्टारी उद्योग व व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने इस गंभीर मुद्दे पर शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर गहरा रोष जताया है। जेवर एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेस-वे के कारण इस क्षेत्र का तेजी से औद्योगिक और व्यापारिक विस्तार तो हो रहा है, लेकिन बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं आज भी शून्य हैं।
यमुना एक्सप्रेस-वे पर कोहरा, ओवर स्पीड और टायर फटने के कारण यहां अक्सर रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे होते रहते हैं। स्थानीय लोगों का दर्द है कि टप्पल और जट्टारी के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर समुचित चिकित्सा सुविधाएं, वेंटिलेटर या विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से घायलों को नोएडा अथवा अलीगढ़ रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
इन स्थानों पर घायल को ले जाने में लगने वाले एक से दो घंटे गंभीर रूप से घायल मरीजों के लिए काल साबित होते हैं। समय पर प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण कई लोग रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
किसान नेता रमेश कुमार अत्री और व्यापारी नेता प्रेमचंद्र अग्रवाल ने कहा कि टप्पल में ट्रामा सेंटर का होना यहां के लोगों के जीने का अधिकार है। हम और तमाशबीन बने नहीं रह सकते। इलाज के अभाव में किसी भी परिवार का चिराग नहीं बुझने दिया जाएगा। अगर सरकार ने जल्द संज्ञान नहीं लिया तो संगठन बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।