अन्य केंद्र भारतीय किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठा. भानु प्रताप सिंह ने कहा कि हम तीनों नए कृषि कानूनों की वापसी नहीं चाहते हैं। तीनों कृषि कानूनों की वापसी से देश में अराजकता फैलेगी। मौका परस्त लोग अनुच्छेद 370, एनआरसी, तीन तलाक समेत अन्य कानूनों की वापसी की मांग को लेकर बड़े आंदोलन कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। हम ऐसा नहीं चाहते हैं कि कोई गलत नजीर बने। हम चाहते हैं कि किसान आयोग का गठन हो और उसका अध्यक्ष और सदस्य किसान हो। वही तय करे कि फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या हो। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो। इन मांगों को मनवाने के लिए संगठन का शांतिपूर्वक विरोध जारी रहेगा।
अमर उजाला से बातचीत में भानु प्रताप सिंह ने संयुक्त मोर्चा के नेताओं को बेईमान बताते हुए कहा कि हम मोर्चा से तब जुड़े थे, जब पंजाब के किसानों पर लाठीचार्ज हुआ था। लेकिन लाल किला पर झंडा फहराने से लेकर अन्य देश विरोधी तांडवों से आहत होकर हम मोर्चा से अलग हो गए। अब संयुक्त किसान मोर्चा से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। भाकियू टिकैत के नेता राकेश टिकैत पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब उनके पिता अध्यक्ष थे, तब उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी, अब वे भ्रष्टाचार करके पैसे वाले बन गए हैं।
प्रदेश के सभी जिलों में चल रहे दौरों को लेकर उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि किसानों की समस्याएं उठाना है। हम बहन जी, अखिलेश एवं कांग्रेस की सरकार के राज में भी किसानों की बात कहते रहे हैं और अब भाजपा के राज में भी यही काम कर रहे हैं। अडानी व अन्य उद्योगपतियों द्वारा जगह-जगह गोदाम बनाने एवं नये कानूनों के बाद किसान के खेत से ही उसकी उपज खरीदने के मामले में उन्होंने कहा कि किसान आयोग का गठन ही इसकी काट है। किसान ही तय करेगा कि किसी भी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या हो, तब उद्योगपति किसान का शोषण नहीं कर सकेंगे। आयोग में किसी राजनेता एवं प्रशासनिक अधिकारी के लिये कोई जगह नहीं होगी।