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Aligarh: 28 हजार करोड़ के करार वाली कंपनी का अता-पता नहीं, एमओयू पर हस्ताक्षर कर पलट के नहीं देखा

Thu, 27 Jun 2024 02:01 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ में 44 हजार करोड़ के निवेश पर करार करने वाले निवेशक अभी तक काम शुरू नहीं कर पाए हैं, जिनमें सबसे बड़ा निवेश करने वाली दक्षिण भारत की ची-प्राइम फर्म है। जिसने 28921 करोड़ के निवेश पर करार कर सेमी कंडक्टर बनाने की यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया था। यह इस समिट का सबसे बड़ा करार था।
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बड़ी खबर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने और कारोबारी स्थिति को मजबूत करने के इरादे से आयोजित यूपी इंवेस्टर्स समिट में 28 हजार करोड़ के करार का निवेश करने वाली कंपनी का अता-पता नहीं है। दक्षिण भारत की सेमी कंडक्टर बनाने का प्रस्ताव लाने वाली कंपनी से उद्योग विभाग के तमाम प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।

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ऐसे में अगर यह कंपनी संपर्क में नहीं आई तो समिट में पचास हजार करोड़ के निवेश के करार में से 28 हजार करोड़ का यह हिस्सा सबसे बड़ा झटका हो सकता है। हैरान करने वाली बात ये है कि अभी तक जिले में मात्र छह हजार करोड़ के निवेश पर करार करने वाली कंपनियों ने काम शुरू किया है। शेष 44 हजार करोड़ के निवेश पर काम कराने के लिए उद्योग विभाग प्रयासरत है।

सूबे की सरकार ने फरवरी 2024 में यूपी इंवेस्टर्स समिट का आयोजन किया। प्रदेश स्तर पर हुए आयोजन में बड़े निवेशक व जिला स्तर पर छोटे निवेशक आमंत्रित किए गए। इनके द्वारा जिले में पचास हजार करोड़ रुपये के निवेश के 486 करार किए गए। इनमें एमएसएमई, होर्टिकल्चर, आईटी, एक्सप्रेस वे, यूपीएसआईडीसी, स्वास्थ्य, होटल आदि क्षेत्र के कई बड़े करार थे। इसके बाद से इन करार करने वाले निवेशकों के उद्यम जिले में स्थापित करने के प्रयास उद्योग विभाग द्वारा शुरू किए गए। 
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इनमें से अब तक प्रयास के बाद छह हजार करोड़ के निवेश वाले उद्यम शुरू हो पाए हैं। जिनमें से काफी उद्यम समिट से पहले के हैं। जून के पहले सप्ताह में हुई समीक्षा में सामने आया कि 44 हजार करोड़ के निवेश पर करार करने वाले निवेशक अभी तक काम शुरू नहीं कर पाए हैं, जिनमें सबसे बड़ा निवेश करने वाली दक्षिण भारत की ची-प्राइम फर्म है। जिसने 28921 करोड़ के निवेश पर करार कर सेमी कंडक्टर बनाने की यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया था। यह इस समिट का सबसे बड़ा करार था।

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आज तक इस कंपनी की ओर से करार पर साइन के बाद कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसे लेकर परेशान उद्योग विभाग द्वारा कंपनी से संपर्क करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। कई बार मेल के जरिये संवाद हुआ है। मगर आज तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। एक मर्तबा जरूर जमीन की जरूरत के संबंध में संवाद हुआ था। इसके बाद से फिर कंपनी की ओर से न तो किसी तरह का संपर्क किया गया और न उद्योग विभाग के किसी मेल का जवाब दिया गया है। इसे लेकर उद्योग विभाग के अधिकारी परेशान हैं। 

बाकी अन्य निवेशकों से संपर्क व उनके करारों को धरातल पर लाने के प्रयास जारी हैं। समय समय पर उन्हें बुलाया जाता है। उनकी जरूरतें पूछी जाती हैं। उनमें कुछ जमीन तलाश रहे हैं तो कुछ सरकारी जमीन मांग रहे हैं। इस पर उद्योग विभाग के स्तर से सहयोग का भरोसा दिया जाता है। मगर अभी तक किसी तरह की ठोस योजना सामने नहीं आई है। अगर ये करार करने वाले निवेशक धरातल पर नहीं आते हैं और सबसे बड़े निवेश वाली कंपनी से संपर्क नहीं होता है तो यह इस समिट की अलीगढ़ प्रोजेक्ट की फजीहत ही होगी।
 
ये सही है कि अभी बड़े पैमाने पर करार करने वाले निवेशक अपना काम धरातल पर नहीं लाए हैं। उनसे बातचीत जारी है। सबसे बड़ी कंपनी ची प्राइम के स्तर से कोई न तो संपर्क नहीं किया जा रहा है। न हमारे स्तर से किए जा रहे प्रयास पर कोई जवाब दिया जा रहा है। मगर प्रयास जारी हैं।-वीरेंद्र कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग
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