अपने जर्जर घर के आगे खड़ी वृद्धा साथ में बेटा
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अलीगढ़ में दादों के मोहल्ला ताल निवासी वृद्धा कृष्णा देवी सरकार की तमाम योजनाओं के बावजूद कष्टों में हैं। न राशन मिल रहा है, न घर में पीने का पानी आ रहा है। कच्चे गिरासू मकान की छत बुरी तरह से टपक रही है। भीषण बरसात में भी शौच जाने के लिए लड़खड़ाते कदमों से एक किमी चलती हैं। जंगल से लकड़ी बीन कर लाती हैं तो चूल्हा जलता है। कृष्णा सिर्फ उस एक हजार रुपये पर जिंदा हैं, जो उन्हें वृद्धावस्था पेंशन से मिलते हैं। वरना मुफ्त अनाज, हर घर जल, इज्जत घर शौचालय, प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, मनरेगा सहित बाकी योजनाओं के कभी इनके घर का रास्ता नहीं देखा।
कृष्णा देवी पत्नी स्व प्यारेलाल के पांच बेटे थे। प्यारेलाल की मृत्यु के बाद तीन बेटों की मौत हो गई। दो बेटों में से एक रमेश करीब दो साल पूर्व बाहर गया तो फिर लौटा ही नहीं। दूसरा बड़ा बेटा 48 साल का नरेश आये दिन बीमार रहता है। कभी कभी मजदूरी करने जाता है। घर में खाने के लाले हैं, वो भरे मन से कहतीं हैं कि कहां जाएं क्या करें..।
वृद्धा के अनुसार करीब दो साल पहले अनाज कम देने की शिकायत पर राशन कोटेदार ने उनका कार्ड खत्म कर दिया गया। इसके बाद कई वार ऑनलाइन आवेदन किया गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। खेती की जमीन नहीं है। परेशान कृष्णा देवी को तमाम सरकारी योजनाएं केवल सपना लगती हैं। योजनाएं सच में जरूरतमंद तक पहुंचती तो शायद कृष्णा का दुख कुछ कम होता।