साल 2020 में कोरोना वायरस ने पूरे देश में हाहाकार मचाया था। किसी का व्यापार खत्म हुआ तो कइयों की नौकरी चली गई थी। कुछ लोगों ने अपने परिजनों को खो दिया था। लेकिन कुछ लोगों ने आपदा को अवसर के रूप में इस्तेमाल किया और अपने हुनर को नई पहचान दी। ऐसे ही हैं शहर निवासी उमेश कुमार, जिन्होंने कोरोना काल में नौकरी छूटने के बाद अपने छोटे भाई के साथ मिलकर डेक ओवन बनाने का काम शुरू किया। एक साल में वह 50 से ज्यादा डेक ओवन बनाकर देश के कई हिस्सों में भेज चुके हैं। उनकी यूनिट में आठ लोग काम कर रहे हैं। डेक ओवन का इस्तेमाल बड़ी-बड़ी बेकरी में होता है।
शहर के सासनी गेट स्थित पला रोड निवासी उमेश कुमार शर्मा ने कोरोना काल में नौकरी जाने के बाद अपने हुनर को अपना पेशा बना लिया। वर्ष 2009 में उमेश बेंगलुरु स्थित डेक ओवन बनाने वाली निजी कंपनी में काम करते थे। वह कंपनी के सर्विसिंग विभाग में काम करते थे। कोरोना काल में वर्ष 2020 में उनकी नौकरी चली गई, जिसके बाद उन्होंने अपने शहर का रुख किया। परिवार में पत्नी सहित तीन बच्चों की जिम्मेदारी थी। वर्ष 2021 में उमेश ने अपने छोटे भाई रवि के साथ मिलकर दीपास बेकरी इक्यूपमेंट के नाम से फर्म बनाई और अलीगढ़ का नाम डेक ओवन बनाने के क्षेत्र में दर्ज कराया। करीब पांच लाख रुपये से काम शुरू किया। उनको पहला ऑर्डर श्रीनगर से मिला। वह एक साल में करीब पचास डेक ओवन बना चुके हैं। उन्होंने बताया कि अभी आठ लोग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में काम करते हैं।
पहले बेंगलुरु और दिल्ली में बनते थे
जिले में उमेश कुमार के काम शुरू करने से पहले बेंगलुरु और दिल्ली में ही डेक ओवन बनते थे। लेकिन, उमेश और उनके छोटे भाई रवि ने साथ मिलकर काम किया। डेक ओवन की दुनिया में अलीगढ़ की साख बढ़ाई। अब देश में तीन जगहों पर इनका निर्माण हो रहा है, जिसमें अलीगढ़ का भी नाम है।
तीन प्रकार के होते हैं डेक ओवन
डेक ओवन तीन प्रकार के होते हैं। सिंगल डेक, डबल डेक व ट्रिपल डेक। सिंगल डेक की कीमत लगभग 90 हजार रुपये हैं। डबल डेक की कीमत 1 लाख 70 हजार व ट्रिपल डेक की कीमत 2.5 लाख के आसपास है। सिंगल डेक में दस ट्रे होती हैं। डबल और ट्रिपल में 20 व 30 ट्रे होती हैं।
पर्यटन स्थलों पर बिकते हैं ज्यादा डेक ओवन
डेक ओवन निर्माता रवि शर्मा ने बताया कि यह ओवन बड़े आकार के होते हैं। ये सामान्य ओवन से अलग काम करते हैं। इनकी मांग पर्यटन स्थलों पर ज्यादा होती है। खासतौर पर पहाड़ों पर इनकी अच्छी मांग है क्योंकि ठंड के मौसम में केक पेस्ट्री, पिज्जा, पेटीज की ज्यादा मांग होती है।
यहां भेजे डेक ओवन
वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, हाथरस, अलीगढ़, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, पंजाब, श्रीनगर, जम्मू, नैनीताल, मेरठ, बुलंदशहर, खुर्जा, हापुड़, हल्द्वानी, भीमताल, फतेहपुर, लालगंज, लोहाघाट, रानीखेत, अल्मोड़ा, बनबसा आदि हैं।
सोशल मीडिया ने काम को रफ्तार दी
रवि शर्मा ने बताया कि जिले में पहले काम सुस्त था। शुरूआती दिनों में कोई काम नहीं मिला। लॉकडाउन के चलते सब जगह बाजार बंद पड़े थे। लेकिन, पुराने संपर्क और सोशल मीडिया पर प्रचार की कमान संभालने के बाद काम की रफ्तार बढ़ गई। देश के कोने-कोने से ऑर्डर आने लगे।
उमेश कुमार शर्मा।- फोटो : CITY OFFICE