इंसानों के सेवन के लिए घातक और भारत सरकार द्वारा 20 साल पहले प्रतिबंधित की गई थाई मांगुर मछली को भारी मात्रा में बाजार में बिकते हुए पाया गया। जमालपुर में इस प्रतिबंधित मछली की बिक्री हो रही थी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने तीन दुकानदारों से 200 किलो मछली जब्त की। जब्त की गई मछलियों को गड्ढा खुदवाकर उसमें दफन करवा दिया गया। इधर, दुकानदारों से पूछताछ की जा रही है कि वह मछली को कहां से लाए थे। इसके पालन का काम कहां पर हो रहा है।
जिला अभिहित अधिकारी सर्वेश कुमार के मुताबिक कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह के निर्देश पर अभियान चलाया गया। सूत्रों से जानकारी मिली थी कि जनपद में कई स्थानों पर प्रतिबंधित प्रजाति की मछलियों की बिक्री हो रही है। इस पर सीएफओ अक्षय प्रधान की टीम जमालपुर पर खाद्य कारोबार कर्ताओं मो. यूसुफ पुत्र मो. शफी निवासी शमशाबाद, निहाल पुत्र मुन्ना निवासी रसालगंज व हातिम पुत्र लतीफ जमालपुर की दुकान पर पहुंची। इन तीनों की दुकान से प्रतिबंधित प्रजाति की थाई बांगुर मछली का भंडारण एवं विक्रय करते हुए पाया गया। मौके पर लगभग 200 किलो मछली पाई गई। सभी को जब्त कर नष्ट कराया गया है। इसके साथ ही रसलगंज मछली मंडी पर भी औचक छापामारी की गई। पर, वहां कोई प्रतिबंधित प्रजाति की मछली नहीं पाई गई।
समस्त तहसीलों में भी प्रतिबंधित प्रजाति की मछलियों का निरीक्षण किया गया। जिला अभिहित अधिकारी के मुताबिक इंसानों के खाने के लिए यह मछली नहीं है। यह दूषित जल में पाली जाती है। इसके साथ ही यह मछली पानी में रहने वाले कीड़ों को खाकर बढ़ती है। मछली विक्रेताओं को इसकी बिक्री के प्रतिबंधित होने की जानकारी दी गई। अभियान में खाद्य सुरक्षा अधिकारी कृपाशंकर, अमर बहादुर सरोज, प्रभु चौधरी, प्रमोद कुमार यादव शामिल रहे।
सरसों के तेल का नमूना भरा
खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार यादव ने आईटीआई रोड स्थित रवि जनरल स्टोर के संचालक रवि कुमार सिंह पुत्र दिनेश कुमार की दुकान पर छापामार कार्रवाई की। यहां पर सरसों का तेल संदिग्ध पाया गया। इसका नमूना संग्रहित करते हुए जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।