सिविल लाइंस थाना व साइबर सेल की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन-420 के तहत क्रेडिट कार्ड से रुपये पार करने वाले तीन हैकर दबोचे हैं। ये तीनों बिहार के रहने वाले हैं, मगर इन दिनों अलीगढ़ में बैंक खातों के सेटलमेंट के इरादे से घूम रहे थे। पूछताछ में इन्होंने साइबर ठगी के रैकेट को बैंक खाते मुहैया कराना स्वीकारा है।
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, विपिन भारती निवासी मकान नंबर 4, गली नंबर 4 जगदंबा कालोनी जौहरीपुर दिल्ली, मूल रूप से डिबाई के रहने वाले हैं। वे 25 मई को किसी काम से अलीगढ़ आए थे। तभी उन्हें क्रेडिट कार्ड से 42240 रुपये कटने का मैसेज मिला। चूंकि न तो उन्होंने खरीदारी की थी और न किसी को कार्ड दिया था। इसलिए रुपये कटने पर वे हैरान रह गए। तत्काल उन्होंने साइबर सेल से संपर्क किया। मामले में सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
साइबर सेल से हुई जांच में उजागर हुआ कि बिहार व कोलकाता के साइबर हैकिंग नेटवर्क यह रुपये पार किए हैं। जांच में पता चला कि एसबीआई के जिस खाते में विपिन के क्रेडिट कार्ड से रुपये ट्रांसफर हुए हैं, उस खाते का धारक इन दिनों अलीगढ़ में है। खोजबीन पर खाताधारक सहित तीन लोगों को दबोच लिया गया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम बिजाली झा पुत्र हरिकान्त झा निवासी कछुवी थाना लखनौर मधुबनी बिहार हाल निवासी नाहरपुर रूपा अनाज मंडी थाना खानसा गुरुग्राम हरियाणा, मंजय कुमार झा पुत्र फूल झा निवासी रहिका मधुबनी बिहार व दिनेश कुमार मिश्रा पुत्र हरिदेव मिश्रा निवासी सतलखा रहिका मधुबनी बिहार बताए। उनके पास से तीन मोबाइल, 4 क्रेडिट कार्ड बरामद हुए। इस गिरफ्तारी में सिविल लाइंस के साथ-साथ साइबर सेल के राकेश कुमार की भूमिका रही।
बैंक खातों की खोज में आए थे तीनों
उन्होंने स्वीकारा है कि उनके हैकिंग नेटवर्क के सरगना बिहार, कोलकाता में बैठकर ठगी करते हैं। ठगी का रुपया उनके बैंक खातों में ट्रांसफर होता है। हमारे खातों से रुपये हमें कमीशन देने के बाद हैकरों के पास जाता है। अब तक वे अपने नाम से ही बैंक खाते चला रहे हैं। उन्हें समय-समय पर परिचितों से बैंक खाते लेने पड़ते हैं। जिसका उसे बाकायदा कमीशन देते हैं। वह यहां अपने कुछ परिचितों के पास उसी खाता सेटलमेंट के सिलसिले में आए थे। उन्होंने यह भी स्वीकारा कि उनका गैंग फर्जी आईडी पर बैंक खाते खोलकर उनमें रुपये ट्रांसफर नहीं कराता। क्योंकि ऐसा करने पर पुलिस को संदेह जल्दी हो जाता है। इसलिए वे सही नाम पते पर ही बैंक खाते किराये पर या कमीशन पर लेते हैं। उन्होंने पिछले लॉकडाउन से इस धंधे में उतरना और अब तक काफी लोगों को चपत लगाकर लाखों रुपये इधर उधर करना स्वीकारा है।