मथुरा में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू
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महानगर में सुगम यातायात के लिए इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) का संचालन जोर-शोर से किया गया था। लेकिन सारसौल स्थित चार्जिंग स्टेशन का मॉडल तैयार करते समय बरती गई लापरवाही ई-बसों की राह में रोड़ा अटका रही है। चार्जिंग स्टेशन के मुख्य द्वार से लगभग दस मीटर की दूरी पर बिजली का खंभा होने से चालकों को बसों को मोड़ने व निकालने में समस्या होती है। इससे समय की काफी बर्बादी होती है। इसके बावजूद इस खंभे को हटाने के लिए अभी तक कोई पहल नहीं की गई है।
पीपीपी मॉडल के तहत जनता को सुगम, सुरक्षित सफर कराने के लिए सरकार ने चार जनवरी को ई-बस योजना का लोकार्पण किया था। अलीगढ़ को कुल 15 ई-बसें मिली थीं। अभी दस ई-बसें मिलना बाकी हैं। दो महीने गुजरने को हैं। लेकिन अभी तक दो रूटों (खेरेश्वर से बोनेर और महरावल से हरदुआगंज) पर ही ई-बसें चल पाई हैं। बाकी दस ई-बस परिवहन निगम के सारसौल स्थित डिपो में खड़ी हैं।
ई-बस प्रबंधन के पास इन बसों को अपने स्टेशन में खड़ी करने की जगह ही नहीं है, क्योंकि अभी फर्श, टीनशेड और चार्जिंग प्वाइंट का निर्माण कार्य चल रहा है। नगर आयुक्त व मंडलायुक्त कई बार नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। वहीं, ई-बस चार्जिंग स्टेशन के मुख्य द्वार के ठीक सामने लगे बिजली के खंभे के कारण बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है। अब तक प्रबंधन ने इस समस्या के समाधान के लिए पहल नहीं की है।
बिजली के खंभे को लेकर ई-बस प्रबंधन से चर्चा हुई थी। मॉडल बनाने से पहले इस बारे में सोचना चाहिए था। मुख्य दरवाजा थोड़ा एक तरफ और खिसका लेते तो यह समस्या नहीं होती। अब बिजली विभाग ही इस समस्या का हल निकाल सकता है। इसके अलावा मुख्य द्वार में हेरफेर करना पड़ेगा।
- मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम।