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मनोचिकित्सक से ईलाज कराएं स्वामी प्रसाद : हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने दी सलाह, फांसी की उठी मांग

Wed, 25 Jan 2023 03:42 PM IST
चमन शर्मा चमन शर्मा

सार

सपा नेेता स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरित मानस पर विवादित बयान के बाद अलीगढ़ में भी तहरीर दी गई। हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी प्रसाद को मानसिक रूप से बीमार बताया। दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री ने तो फांसी देने तक की मांग की।
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हिंदू महासभा राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक कुमार पाण्डेय - फोटो : वीडियो ग्रेब
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विस्तार
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राम चरित मानस पर दिए गए स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान पर अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने उन्हें सलाह दी है कि वह मनोचिकित्सक से ईलाज कराएं। स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ हिंदू जागरण मंच ने अलीगढ़ के सासनीगेट थाने में तहरीर भी दी है। वहीं दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रघुराज सिंह ने स्वामी प्रसाद मौर्य को फांसी देने की मांग की है।

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मनोचिकित्सक से ईलाज कराएं स्वामी प्रसाद
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा कि अपना राजनीतिक जीवन समाप्त होते देख, स्वामी प्रसाद मौर्य मानसिक रूप से दिवालिया हो गए हैं । उन्हें मनोचिकित्सक की आवश्यकता है, उनका सही इलाज होना चाहिए। ऐसे व्यक्ति का समाज में खुले घूमते रहना अच्छी बात नहीं है। ऐसा व्यक्ति समाज में गंदगी ही फैलाएगा।

हिंदू जागरण मंच ने दी थाने में तहरीर
हिंदू जागरण मंच के प्रांत सह संयोजक मनोज कुमार के साथ पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने सासनीगेट थाने में सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ तहरीर दी है। तहरीर में मौर्य को गिरफ्तार करने की मांग की गई है। 
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राज्यमंत्री ने उठाई फांसी की मांग
दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रघुराज सिंह ने स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य को फांसी दी जानी चाहिए। ऐसे नेताओं की प्रोपर्टी की जांच भी होनी चाहिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते अखिलेश यादव तुरंत स्वामी प्रसाद मौर्य को निष्कासित करें।

यह दिया था बयान
स्वामी प्रसाद मौर्य ने रविवार को कहा था कि रामचरितमानस की कुछ पंक्तियों में जाति, वर्ण और वर्ग के आधार पर यदि समाज के किसी वर्ग का अपमान हुआ है तो वह निश्चित रूप से धर्म नहीं है। यह अधर्म है, जो न केवल भाजपा बल्कि संतों की भी हमले के लिए आमंत्रित कर रहा है। रामचरित मानस की कुछ पंक्तियों में तेली और कुम्हार जैसी जातियों के नामों का उल्लेख है, जो इन जातियों के लाखों लोगों की भावनाओं को आहत करती हैं। उन्होंने मांग की थी कि पुस्तक के ऐसे हिस्से पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
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