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कांग्रेस नेता हत्याकांड: लूट के इरादे से मारा गया कांग्रेस नेता, छह गिरफ्तार

Sun, 20 Oct 2019 10:30 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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अलीगढ़ पुलिस - फोटो : Amar Ujala
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कांग्रेस नेता व पूर्व पार्षद पति फारुख हत्याकांड को लुटेरों ने डकैती के इरादे से अंजाम दिया था। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए छह लुटेरे गिरफ्तार कर लिए हैं। इनके पास से फारुख से लूटी गई रिवाल्वर भी बरामद कर ली गई है। खास बात है कि गिरफ्तार लुटेरों में भाजपा अनुसूचित मोर्चा के ब्रज क्षेत्र मंत्री अरुण फौजी का सगा भतीजा भी शामिल है। इनके गैंग का सरगना एक पेशेवर लुटेरा है, जो पिछले माह रामघाट रोड पर हुई एक लाख रुपये की लूट की घटना में वांछित चल रहा था। उसी ने अपनी बहन की शादी के लिए रुपये जुटाने के लिए इस लूट को प्लांड किया था। इनको मुखबिरी थी कि फारुख के पास शाम के वक्त रुपये मिलेंगे।

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मगर जैसे ही लुटेरों ने उसके दफ्तर में फारुख को घेरा तो फारुख ने उन पर रिवाल्वर तान दी। बस वहीं बदमाशों के पैर उखड़ गए और उसकी हत्या कर फायरिंग करते हुए फारुख की रिवाल्वर लेकर भाग गए।  गिरफ्तार लुटेरों में एक जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी दिल्ली और एक खैर के एक डिग्री कॉलेज का छात्र है। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। 

एसपी देहात मणीलाल पाटिदार ने रविवार को एसएसपी कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि इस मामले में सर्विलांस टीम, एसओजी और थाना पुलिस की टीम ने लगातार रैकी कर रही थीं। सीसीटीवी फुटेज में दो बदमाशों के चेहरों की मुखबिरों के जरिये पहचान हो गई थी। इसके बाद उनको सर्विलांस पर लेकर लगातार पीछा किया जा रहा था। इसी बीच बीती रात एएमयू सोलर प्लांट के पीछे मुठभेड़ में हत्या में शामिल सभी छह के छह बदमाश दबोच लिए गए।
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इन्होंने अपने नाम शेखर भारद्वाज पुत्र राजकुमार निवासी राजीव नगर, क्वार्सी, आमिर पुत्र दिलशाद निवासी नगला मल्लाह, क्वार्सी, शाजेब पुत्र अबरार निवासी नई बस्ती, बन्नादेवी, प्रियेंद्र प्रताप पुत्र हरवीर सिंह निवासी खैर बाईपास, बन्नादेवी, अनुराग यादव उर्फ अन्नू पुत्र प्रमोद निवासी बसंत विहार कालोनी, एटा चुंगी, गांधी पार्क, सोहिल पुत्र शकील निवासी जीवनगढ़ गली-5, क्वार्सी बताया। इनमें से आमिर पिछले माह किशनपुर तिराहा पर रामघाट जरगवां के ट्रांसपोर्ट कारोबारी से हुई एक लाख लूट के मामले में वांछित था। उसने ही लूट की योजना बनाई थी।

आमिर ने योजना को अंजाम देने के लिए जेल के दोस्त अनुराग यादव उर्फ अन्नू को साथ लिया था। इसके बाद अन्य चार साथियों को इन दोनों ने योजना में शामिल किया था। इनके पास से तीन तमंचे, 9 कारतूस, लूटी गई रिवाल्वर मय 6 कारतूस, बाइकें बरामद हुई हैं।

लूट की योजना रिवाल्वर देखते ही हत्या में बदली

पुलिस के अनुसार आमिर ने बताया कि उसे बहन की शादी के लिए पैसों की जरूरत थी। इसके लिए उसने पहले से परिचित फारुख को निशाना बनाया। उसे पता था कि फारुख फाइनेंस का काम करता है। दीवाली आने के चलते फाइनेंस का काम अच्छा चल रहा है। इसके उसने तीन से चार दिन रेकी भी की थी। रैकी का काम सब्जी बेचने वाले शाजेब से कराया था।

हत्याकांड वाले दिन वह अपने साथियों के साथ फारुख के कार्यालय पहुंचा। वहां पहुंचते ही सभी लूट के इरादे से फारुख की ओर बढ़ रहे थे। तभी फारुख ने उन्हें देख लिया और सशस्त्र बदमाशों को अपनी ओर आता देख फारुख ने रिवाल्वर तान दी। यह देखते ही सोहेल ने फारुख पर गोली चला दी जो उसके सीने में आर-पार हो गई। इस दौरान वहां मौजूद फारुख के साथी ने सोहेल को दबोच लिया। इसके बाद उसके साथियों ने फायरिंग कर सोहेल को छुड़ाया और बाहर आकर फायरिंग करते हुए भाग गए। हालांकि वह कैश नहीं लूट सके। रिवाल्वर को लूटकर फरार हो गए थे।
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ऊंचे ख्वाबों ने पढ़े-लिखे नौजवान पहुंचाए जेल 

पुलिस के अनुसार आमिर गिरोह के सभी अपराधी 19 से 22 साल की उम्र के हैं। सभी अच्छे परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। मगर, उनके ऊंचे ख्वाबों और शौकों ने उन्हें अपराध की दुनिया में धकेल दिया है। आमिर कई लूट, हत्या और जानलेवा हमलों में जेल जा चुका है। अनुराग भी शातिर लुटेरा है। पूर्व में जेल जा चुका है। इन दोनों ने यह गैंग बनाया है और इनकी संगत में आकर अन्य चारों युवक भी जल्द पैसा कमाने को लेकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गए।

इनमें से खुद आमिर की अपनी दूध की डेयरी है, जबकि अनुराग जामिया मिलिया इस्लामियां यूनिवर्सिटी से बीएससी की पढ़ाई कर रहा है। वहीं प्रियेंद्र भाजपा नेता अरुण फौजी का भतीजा है और उसके पिता बिजली विभाग में कैशियर के पद पर तैनात हैं। वह खैर के एक डिग्री कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई कर रहा है। शेखर भारद्वाज एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता है। इनमें से सोहेल पेंटर है और शाजेब सब्जी बेचता है।

नामजद बरी, पुलिस टीम को इनाम

इस हत्याकांड में नामजद किए गए जावेद को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी है। पुलिस जांच में उसकी लोकेशन घटना के पहले से देहरादून में है। वहीं इन सभी छह आरोपियों की लोकेशन घटना से पहले तस्वीर महल साई ढाबे पर एकत्रित होने की और उसके बाद घटनास्थल पर, घटना के बाद एक घंटे तक प्रियेंद्र के खैर बाईपास प्लाट पर रही। फिर वहां से यह अलग अलग हुए। इन सभी छह अपराधियों का जावेद से कोई कनेक्शन भी नहीं निकला है।

परिवार ने बस पिछले हमले को ध्यान में रखते हुए उसे नामजद कर दिया था। इस खुलासे में सीओ तृतीय अनिल समानिया की अगुवाई में एसओजी इंचार्ज छोटेलाल, सर्विलांस प्रभारी अभय शर्मा, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अमित कुमार की टीम शामिल रही है। पुलिस टीम को दस हजार के इनाम की घोषणा एसएसपी स्तर से की गई है।
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