आमिर ने योजना को अंजाम देने के लिए जेल के दोस्त अनुराग यादव उर्फ अन्नू को साथ लिया था। इसके बाद अन्य चार साथियों को इन दोनों ने योजना में शामिल किया था। इनके पास से तीन तमंचे, 9 कारतूस, लूटी गई रिवाल्वर मय 6 कारतूस, बाइकें बरामद हुई हैं।
लूट की योजना रिवाल्वर देखते ही हत्या में बदली
पुलिस के अनुसार आमिर ने बताया कि उसे बहन की शादी के लिए पैसों की जरूरत थी। इसके लिए उसने पहले से परिचित फारुख को निशाना बनाया। उसे पता था कि फारुख फाइनेंस का काम करता है। दीवाली आने के चलते फाइनेंस का काम अच्छा चल रहा है। इसके उसने तीन से चार दिन रेकी भी की थी। रैकी का काम सब्जी बेचने वाले शाजेब से कराया था।
हत्याकांड वाले दिन वह अपने साथियों के साथ फारुख के कार्यालय पहुंचा। वहां पहुंचते ही सभी लूट के इरादे से फारुख की ओर बढ़ रहे थे। तभी फारुख ने उन्हें देख लिया और सशस्त्र बदमाशों को अपनी ओर आता देख फारुख ने रिवाल्वर तान दी। यह देखते ही सोहेल ने फारुख पर गोली चला दी जो उसके सीने में आर-पार हो गई। इस दौरान वहां मौजूद फारुख के साथी ने सोहेल को दबोच लिया। इसके बाद उसके साथियों ने फायरिंग कर सोहेल को छुड़ाया और बाहर आकर फायरिंग करते हुए भाग गए। हालांकि वह कैश नहीं लूट सके। रिवाल्वर को लूटकर फरार हो गए थे।
पुलिस के अनुसार आमिर गिरोह के सभी अपराधी 19 से 22 साल की उम्र के हैं। सभी अच्छे परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। मगर, उनके ऊंचे ख्वाबों और शौकों ने उन्हें अपराध की दुनिया में धकेल दिया है। आमिर कई लूट, हत्या और जानलेवा हमलों में जेल जा चुका है। अनुराग भी शातिर लुटेरा है। पूर्व में जेल जा चुका है। इन दोनों ने यह गैंग बनाया है और इनकी संगत में आकर अन्य चारों युवक भी जल्द पैसा कमाने को लेकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गए।
इनमें से खुद आमिर की अपनी दूध की डेयरी है, जबकि अनुराग जामिया मिलिया इस्लामियां यूनिवर्सिटी से बीएससी की पढ़ाई कर रहा है। वहीं प्रियेंद्र भाजपा नेता अरुण फौजी का भतीजा है और उसके पिता बिजली विभाग में कैशियर के पद पर तैनात हैं। वह खैर के एक डिग्री कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई कर रहा है। शेखर भारद्वाज एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता है। इनमें से सोहेल पेंटर है और शाजेब सब्जी बेचता है।
नामजद बरी, पुलिस टीम को इनाम
इस हत्याकांड में नामजद किए गए जावेद को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी है। पुलिस जांच में उसकी लोकेशन घटना के पहले से देहरादून में है। वहीं इन सभी छह आरोपियों की लोकेशन घटना से पहले तस्वीर महल साई ढाबे पर एकत्रित होने की और उसके बाद घटनास्थल पर, घटना के बाद एक घंटे तक प्रियेंद्र के खैर बाईपास प्लाट पर रही। फिर वहां से यह अलग अलग हुए। इन सभी छह अपराधियों का जावेद से कोई कनेक्शन भी नहीं निकला है।
परिवार ने बस पिछले हमले को ध्यान में रखते हुए उसे नामजद कर दिया था। इस खुलासे में सीओ तृतीय अनिल समानिया की अगुवाई में एसओजी इंचार्ज छोटेलाल, सर्विलांस प्रभारी अभय शर्मा, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अमित कुमार की टीम शामिल रही है। पुलिस टीम को दस हजार के इनाम की घोषणा एसएसपी स्तर से की गई है।