अभियोजन व बचाव पक्ष के अनुसार, इस मामले में पुलिस चार्जशीट में उजागर हुआ था कि 2005 के पंचायत चुनाव में परौरा की प्रधानी पद पर विकार की भाभी यानि वादी मकदूम की पत्नी बौफिया बेगम व विकार की हत्या में नामजद रिश्ते के भाई-बहनोई जावेद की पत्नी सुबूही चुनाव लड़ी। जावेद को उस समय बसपा में सक्रिय मुजाहिद गुड्डू का समर्थन था, जबकि विकार सपा में सक्रिय था और पूर्व विधायक वीरेश यादव का करीबी था। गुड्डू ने विकार पर अपनी भाभी को चुनाव न लड़ाने का दबाव बनाया। मगर वह नहीं माना।
इस चुनाव में विकार पक्ष तीसरे व जावेद पक्ष दूसरे स्थान पर रहकर चुनाव हार गए थे। पूर्व प्रधान मोती सिंह की पत्नी चुनाव जीती थीं। जिसे गुड्डू ने अपने खिलाफ अदावत माना। इससे पहले 2002 में गुड्डू कल्याण सिंह द्वारा गठित राक्रांपा से छर्रा से विधायकी का चुनाव लड़ा और सपा के वीरेश यादव से हार गए थे। इस चुनाव में भी विकार विरोध में था। पुलिस रिकार्ड के अनुसार, इन्हीं रंजिशों को जोड़कर यह हत्या कराई गई।
घर पर सपा का झंडा लगाना बड़ा कारण
इस हत्या में एक प्रमुख कारण यह भी सामने आया था। प्रदेश में 2007 के विधानसभा व निकाय चुनाव की तैयारियां चल रही थीं। गुड्डू बसपा से टिकट मांग रहा था और शान मियां छर्रा नगर पंचायत से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। विकार ने इसके खिलाफ सपा का झंडा थाम रखा था। वह विधानसभा पर वीरेश के लिए और नगर पंचायत पर शान मियां के खिलाफ सपा के लिए काम कर रहा था। अपने घर पर भी सपा का झंडा लगा रखा था। उस समय इस बात का भी उल्लेख था कि इस अदावत ने उग्र रूप लिया था।
यह मुकदमा बेहद जटिल रहा है। कई न्यायालयों में मुकदमे को बचाव पक्ष द्वारा ट्रांसफर कराया। जिसके चलते विलंब होता गया। मगर पिछले नौ माह से मुकदमे में सभी औपचारिकताएं पूरी कराई गईं और अदालत ने अभियोजन पैरवी के आधार पर सभी को दोषी करार दिया है। एक आरोपी फरार है। उसके वारंट जारी हुए हैं। सजा के लिए 16 जुलाई तारीख नियत की है। - चौ. जितेंद्र सिंह, डीजीसी फौजदारी।