फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सपा नेता विकार हत्याकांड: 18 साल बाद आया फैसला, मुजाहिद गुड्डू-शान मियां सहित छह दोषी

Fri, 12 Jul 2024 10:49 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

फैसला जिला जज संजीव कुमार सिंह की अदालत से सुनाया गया है। जिन्हें दोषी करार दिया गया है, उनमें जिले के हिस्ट्रीशीटर मुजाहिद हसन खां गुड्डू, पूर्व सपा जिला उपाध्यक्ष व कांग्रेस महानगर अध्यक्ष का भाई शान मियां आदि शामिल हैं। दोषी करार दिए गए पांच लोग न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिए गए।
विज्ञापन
अदालत प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अलीगढ़ में छर्रा क्षेत्र की राजनीतिक-आपराधिक वर्चस्व की रंजिश में बहुचर्चित सपा नेता विकार हत्याकांड में 18 वर्ष बाद छह आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। सजा पर सुनवाई के लिए 16 जुलाई की तारीख नियत की गई है। 12 जुलाई को यह फैसला जिला जज संजीव कुमार सिंह की अदालत से सुनाया गया है। जिन्हें दोषी करार दिया गया है, उनमें जिले के हिस्ट्रीशीटर मुजाहिद हसन खां गुड्डू, पूर्व सपा जिला उपाध्यक्ष व कांग्रेस महानगर अध्यक्ष का भाई शान मियां आदि शामिल हैं। दोषी करार दिए गए पांच लोग न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिए गए, जबकि एक के फरार होने पर गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं।

विज्ञापन


घटना 6 मई 2006 की है। वादी मुकदमा बरला के गांव परौरा निवासी मकदूम के अनुसार, शाम करीब पौने पांच बजे वह अपने छोटे भाई सपा नेता व पूर्व सपा विधायक वीरेश यादव के करीबी विकार के साथ कस्बा छर्रा बाजार में काम से आए थे। यहां से वह मोहल्ला पठानान से होकर जा रहे थे, तभी मुशीर व नसीम उन्हें मिले और विकार को बातों में लगाकर अपने घर की गली में ले गए। जहां पहले से घात लगाए अन्य नामजद मुजाहिद गुड्डू, खालिद, शान मियां, जावेद बैठे थे और इन्होंने एकराय होकर विकार को गोली मार दी।   

मुकदमे के आरोपी मकदूम गोली से जख्मी विकार को कस्बे के नर्सिंग होम लेकर गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना के आधार पर आरोपियों पर दो बार में चार्जशीट दायर की। न्यायालय में लंबे समय तक सत्र परीक्षण चला। इसके बाद साक्ष्यों व गवाही के आधार पर शुक्रवार को निर्णय की तारीख नियत की गई। दोपहर में सभी आरोपी तलब किए गए। मगर मुशीर को छोड़कर सभी आरोपी कोर्ट में हाजिर हुए। सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस व साक्ष्यों-गवाही के आधार पर सभी छह आरोपियों को दोषी करार देकर अभिरक्षा में लेने का आदेश दिया। मुशीर के फरार होने पर उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए। बाकी को जेल भेज दिया।
विज्ञापन


ये दोषी करार
- मुशीर पुत्र अमीर अहमद निवासी मोहल्ला पठानान छर्रा (ये है फरार)। 
- नसीम पुत्र अमीर अहमद निवासी मोहल्ला पठानान छर्रा। 
- मुजाहिद हसन खां गुड्डू पुत्र शब्बीर हसन बरगद हाउस सिविल लाइंस, मूल निवासी परौरा बरला 
- खालिद पुत्र चाहत खां निवासी मोहल्ला पठानान छर्रा। 
- शान मियां पुत्र गुलजार अहमद निवासी धौर्रा क्वार्सी, मूल निवासी कस्बा छर्रा। 
- जावेद पुत्र करीर्मरहमान निवासी परौरा बरला 

विज्ञापन

विवेचना-बयानों में यह राजनीतिक रंजिश हुई थी उजागर

अभियोजन व बचाव पक्ष के अनुसार, इस मामले में पुलिस चार्जशीट में उजागर हुआ था कि 2005 के पंचायत चुनाव में परौरा की प्रधानी पद पर विकार की भाभी यानि वादी मकदूम की पत्नी बौफिया बेगम व विकार की हत्या में नामजद रिश्ते के भाई-बहनोई जावेद की पत्नी सुबूही चुनाव लड़ी। जावेद को उस समय बसपा में सक्रिय मुजाहिद गुड्डू का समर्थन था, जबकि विकार सपा में सक्रिय था और पूर्व विधायक वीरेश यादव का करीबी था। गुड्डू ने विकार पर अपनी भाभी को चुनाव न लड़ाने का दबाव बनाया। मगर वह नहीं माना। 

इस चुनाव में विकार पक्ष तीसरे व जावेद पक्ष दूसरे स्थान पर रहकर चुनाव हार गए थे। पूर्व प्रधान मोती सिंह की पत्नी चुनाव जीती थीं। जिसे गुड्डू ने अपने खिलाफ अदावत माना। इससे पहले 2002 में गुड्डू कल्याण सिंह द्वारा गठित राक्रांपा से छर्रा से विधायकी का चुनाव लड़ा और सपा के वीरेश यादव से हार गए थे। इस चुनाव में भी विकार विरोध में था। पुलिस रिकार्ड के अनुसार, इन्हीं रंजिशों को जोड़कर यह हत्या कराई गई। 

घर पर सपा का झंडा लगाना बड़ा कारण
इस हत्या में एक प्रमुख कारण यह भी सामने आया था। प्रदेश में 2007 के विधानसभा व निकाय चुनाव की तैयारियां चल रही थीं। गुड्डू बसपा से टिकट मांग रहा था और शान मियां छर्रा नगर पंचायत से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। विकार ने इसके खिलाफ सपा का झंडा थाम रखा था। वह विधानसभा पर वीरेश के लिए और नगर पंचायत पर शान मियां के खिलाफ सपा के लिए काम कर रहा था। अपने घर पर भी सपा का झंडा लगा रखा था। उस समय इस बात का भी उल्लेख था कि इस अदावत ने उग्र रूप लिया था।
यह मुकदमा बेहद जटिल रहा है। कई न्यायालयों में मुकदमे को बचाव पक्ष द्वारा ट्रांसफर कराया। जिसके चलते विलंब होता गया। मगर पिछले नौ माह से मुकदमे में सभी औपचारिकताएं पूरी कराई गईं और अदालत ने अभियोजन पैरवी के आधार पर सभी को दोषी करार दिया है। एक आरोपी फरार है। उसके वारंट जारी हुए हैं। सजा के लिए 16 जुलाई तारीख नियत की है। - चौ. जितेंद्र सिंह, डीजीसी फौजदारी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें