जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को निशुल्क स्कूल ड्रेस उपलब्ध कराने के संबंध में बैठक हुई। जिसमें डीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं महिलाओं द्वारा डेढ़ लाख स्कूल ड्रेस तैयार कराई जाएगी, जिससे इन महिलाओं को रोजगार मिलेगा और बच्चों को एक बेहतर नाप की ड्रेस मिल सकेगी। इससे बच्चों की ड्रेस छोटी बड़ी नहीं होगी। हर बच्चे के नाप से ड्रेस बनने से उसकी खूबसूरती और बढ़ेगी। प्रयोग के तौर पर अभी जनपद के आठ विकास खंडों में यह काम होगा।
सफल होने पर इसको सभी ब्लाक में लागू किया जाएगा। बीते साल जिले के 6 विकास खंडों में 1 लाख 25779 स्कूली बच्चों की ड्रेस स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा सिली गयी थी। सीडीओ अनुनय झा ने बताया कि सरकार की मंशा है कि महिलाओं को स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रकार के कार्य सौंप कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए।
इसी क्रम में स्कूल ड्रेस सिलवाई जाएगी। डीसी एनआरएलएम एवं बीएसए द्वारा कार्य योजना तैयार की जा रही है। जनपद स्तरीय अधिकारियों की गठित कमेटी कपड़े का सैंपल एप्रूव्ड करेगी। विद्यालय प्रबंध समिति ड्रेस सिलने के लिये कपड़ा एवं सिलाई की धनराशि उपलब्ध करायेंगे। महिलाओं द्वारा बच्चों के शरीर की वास्तविक नाप लेकर सिलाई की जायेगी। ड्रेस तैयार होने के उपरॉत संबंधित स्कूल या बीईओ समूहों से ड्रेस प्राप्त कर बच्चों को देंगे।
गौर हो कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा हर विद्यार्थी को दो सेट यूनीफार्म नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। शासन द्वारा एक स्कूल ड्रेस की कीमत 300 रूपये निर्धारित है। फिलहाल लगभग 1 लाख 50 हजार स्कूली बच्चों की ड्रेस बनेगी। समूह की महिलाओं को सिलाई कार्य सिखाया गया है। अभी वर्तमान में 8 ब्लाक में समूहों के पास लगभग 2100 सिलाई मशीन हैं। जो मिल कर जुलाई में स्कूल खुलने तक डे्रस बनाएंगी।
बैठक में डीएम सीडीओ ने आपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में अब तक कराये गये विकास कार्यों एवं वर्तमान में हो रहे कार्य का डेटा उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए। प्रेरणा लक्ष्य, मानव संपदा पोर्टल, प्रेरणा तालिका, प्रेरणा ब्लाक योजना की भी समीक्षा हुई।