सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष या वार्ड को किसी भी दुर्घटना होने पर प्रशासनिक अलर्ट दिया जाता है। स्टाफ को तैयार रहने के लिए कहा जाता है। तब स्टाफ दर्द निवारक, हृदयाघात या गंभीर चोट से संबंधित इंजेक्शन सहित अन्य संसाधन तैयार करके रखता है। उसमें सिरिंज पर चिट लगाई जाती है कि सिरिंज में कौन सी दवा भरी है। उसकी भी एक दो घंटे की समयावधि होती है। मगर आज इस तरह का कोई अलर्ट किसी स्तर से जारी नहीं हुआ था।
अंदेशा इस बात का भी
इस विषय में जानकार लोग बताते हैं कि अमूमन सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में गंभीर बीमारी वाले मरीजों को डिस्टिल वाटर के इंजेक्शन इसी तरह से लगा दिए जाते हैं। उसे मरीज से संबंधित बीमारी का इंजेक्शन करार दे दिया जाता है और उसे अपनी बला टालने के लिए रेफर कर दिया जाता है। मरीज भी इंजेक्शन के नाम पर संतुष्ट होकर चला जाता है। कुल मिलाकर यहां भी कुछ इसी तरह का अंदेशा समझ में आ रहा है।
यह विषय बेहद गंभीर है। बिना किसी अलर्ट के इस तरह से सिरिंज भरकर रखना गलत है। हालांकि विषय संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी जांच कराकर दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की तैयारी सिर्फ किसी आपात सूचना या अलर्ट पर की जानी चाहिए।- डा.एमके माथुर, सीएमएस दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय।