जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी को एक लाख पांच रुपये चुकाने के आदेश दिए हैं। जसोदा देवी पत्नी केसरी प्रसाद निवासी धौर्रा माफी के अनुसार उनकी बेटी विमलेश ने बीमा पालिसी ली थी और प्रीमियम भी जमा किया था। नियमित प्रीमियम जमा हो रहा था। अंतिम किस्त 2 जनवरी 2015 को जमा हुई थी।
विमलेश की मौत 14 अगस्त 2015 को जेएन मेडिकल कॉलेज में डिलिवरी के दौरान हो गई। मृत्यु प्रमाणपत्र के साथ बीमा के लिए क्लेम किया गया, लेकिन 26 मार्च 2016 को बीमा कंपनी ने रद्द कर दिया। जसोदा ने बताया कि इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी, सदस्य आलोक उपाध्याय, सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत ने बीमा कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया। प्रार्थिनी को एक महीने में एक लाख पांच हजार रुपये मय 9 फीसदी ब्याज के साथ देने का आदेश दिया।