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अलीगढ़ः गायों की सेवा कर नई इबारत लिख रहे नजमुद्दीन 

Sun, 19 Dec 2021 12:15 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, रिंकू शर्मा, अलीगढ़।
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चारा खिलाकर गायों की सेवा करते डॉ. नजमुद्दीन अंसारी। - फोटो : neeraj
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मरीजों की नब्ज टटोलने वाले डॉ. नजमुद्दीन अंसारी गोभक्त भी हैं। गऊ माता में उनकी अगाध आस्था है। 11 साल से वह करीब दो हजार से अधिक गोवंश की सेवा कर रहे हैं। छेरत-सुढ़ियाल स्थित गोशाला में प्रतिदिन चारे-पानी की व्यवस्था करते हैं। इस कार्य के लिए उन्हें सरकारी अनुदान नहीं मिलता है। डॉ. नजमुद्दीन अंसारी अपने पास से ही सारी व्यवस्था कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस कार्य में मुश्किलें भी आती हैं, आर्थिक तंगी से भी जूझना पड़ता है, मगर गऊ माता की कृपा से सारी बाधाएं दूरी हो जाती हैं। 
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मूल रूप से बिजनौर जिले के कस्बा नहटौर निवासी फिजीशियन डॉ. नजमुद्दीन अंसारी करीब 35 साल पहले अलीगढ़ आए थे। उन्होंने क्वार्सी क्षेत्र के केलानगर चौराहे पर ताज हॉस्पिटल खोला। उन्होंने बताया कि बचपन से ही गोसेवा करना पसंद था। करीब 12 साल पहले जवां क्षेत्र में गए थे। वहां पर देखा कि छेरत-सुढ़ियाल के पास आकाशवाणी केंद्र के पास बड़ी संख्या में गायें भूख-प्यास में भटक रही थीं। यहां कंटीली झाड़ियां थीं।


इन कंटीली झाड़ियों से चोटिल गायों की आंखों में आंसू देखकर मन भर आया। इसके बाद घायल गायों की तीमारदारी से गोसेवा की शुरूआत की। डॉ. नजमुद्दीन अंसारी ने बताया कि पहले घर में डॉक्टरी पेशे से जुड़ी पत्नी व चार बच्चों ने विरोध किया, लेकिन जब उन्हें बताया कि ऐसा करने से उन्हें आत्म शांति मिलती है तो वे भी उनका साथ देने लगे। गोसेवा की इस मुहिम में उनके कुछ दोस्त भी जुड़ गए। वे भी उनकी मदद करने लगे। 
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सुबह ही चारा लेकर पहुंच जाते हैं गोशाला 
मौसम चाहे कोई भी हो डॉ. नजमुद्दीन सुबह ही गायों के लिए सूखे भूसे के साथ चारा आदि लेकर गोशाला पहुंच जाते हैं। जब चारा नहीं मिल पाता है, तब आलू, लॉकी, गाजर आदि सब्जियां खरीदकर ले जाते हैं। गोशाला में एक आवाज लगाने पर गायों का झुंड आ जाता है। डॉ. नजमुद्दीन ने गोवंश को कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए तिरपाल की भी व्यवस्था की है। देखरेख के लिए तीन-चार कर्मचारी भी तैनात हैं। बीमार होने पर गायों के इलाज के पशु चिकित्सक भी पहुंच जाते हैं।

कोविड काल में घर-घर इकट्ठा की रोटियां, मिटाई गायों की भूख
कोविड काल में शहर में उन्हें तमाम गोवंश सड़कों पर भटकते मिले थे। उन्हें भोजन नहीं मिलता था। उन्होंने कॉलोनी के कई घरों को जोड़ा। हर घर से रात में दो-दो रोटी इकट्ठा करते और सुबह गायों को खिलाते। इस शुरुआत के बाद कई लोग मदद के लिए सामने आए। वे लोगों को सचेत भी करते हैं कि  गायों को पॉलीथिन में भोजन न दें। गाय के पेट में पॉलीथिन जाने से उनकी जान को खतरा हो सकता है।

नहीं मिल रहा सरकारी योजना का साथ
गोसेवा करने वाले डॉ. नजमुद्दीन अंसारी को सरकारी मदद न मिलने का दर्द भी है। वे कहते हैं, सरकार निराश्रित गोवंश की देखरेख के लिए प्रति गोवंश 30 रुपये देती है, जो महंगाई के दौर में नाकाफी है। गेहूं का सूखा भूसा 12 रुपये प्रति किलो है। प्याल का भूसा छह रुपये प्रति किलो है। इतने में गाय का पेट भर पाना संभव नही है। गोशाला में करीब 2500 गोवंश हैं, सिर्फ 500 गोवंश की जिओ टैगिंग होने के कारण उसी हिसाब से भुगतान किया गया है। वह भी पूरे साल में सिर्फ चार महीने का दिया गया है।

कट्टीघरों पर लगे रोक
डॉ. नजमुद्दीन अंसारी चाहते हैं कि जिले में संचालित कट्टीघर बंद होने चाहिए। इससे पशुओं का कटान रुकेगा और गोबर पैदा होगा। यूरिया की जगह गोबर का उपयोग खेतों में किया जाए। 
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जिले में गोवंश व गोशालाओं की स्थिति
कुल गोवंश - 3.52 लाख
अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल - 145
संरक्षित गोवंश - 8115
वृहद गो संरक्षण केंद्र नगला ओगर राजू, गभाना में संरक्षित गोवंश -448
कांजी हाउस पला चांद, खैर में संरक्षित गोवंश - 12
पंजीकृत गोशाला ग्रामीण क्षेत्र - 08
अपंजीकृत गोशाला ग्रामीण क्षेत्र -13
गोवंश अभ्यारण्य कोमला, कंदौली -01
आकाशवाणी केंद्र परिसर छेरत-सुढ़ियाल में संरक्षित गोवंश - 1680
नगर निगम द्वारा संचालित दो केंद्रों में संरक्षित गोवंश- 223
11 नगर पंचायतों में संरक्षित गोवंश- 350
जिला पंचायत कांजी हाउस में संरक्षित गोवंश- 08
पंजीकृत चार गोशालाओं (शहरी क्षेत्र) में संरक्षित गोवंश- 1458
अपंजीकृत दो गोशालाओं (शहरी क्षेत्र) में संरक्षित गोवंश- 176
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