मसूदाबाद बस अड्डे से शाम को चलने वाली मथुरा व राजस्थान की बसें नहीं चलती हैं। इसके चलते शहर में इधर-उधर जाकर यात्रियों को बस पकड़नी पड़ती है। अतिरिक्त खर्च के साथ यात्रियों को समय की बर्बादी करनी पड़ती है। वहीं बस को ढूंढने के चक्कर में घंटों तक यात्री परेशान भी रहते हैं।
बता दें कि शाम को पांच बजे के बाद जैसे ही नुमाइश में लोगों की भीड़ बढ़ती है। वैसे ही मसूदाबाद जाने वाली रोडवेज बसों को सारसौल चौराहे से ही लौटा दिया जाता है। ऐसे में मथुरा की बसें सासनीगेट होते हुए गांधीपार्क बस अड्डे तक पहुंचती हैं। बस अड्डे में घुसकर यह बसें बाहर गांधीपार्क गोल चक्कर से घूम जाती हैं।
जबकि राजस्थान की बसें सारसौल बस अड्डे से संचालित होती हैं। ऐसे में यात्री जब मसूदाबाद पहुंचते हैं तो उन्हें इधर-उधर भेजा जाता है। लोग बसों को ढूंढने में घंटों का समय बिता देते हैं। लोगों का कहना है कि कई बार तो बसों को पकड़ने के लिए बाईपास तक जाना पड़ता है, लेकिन महिलाएं और बुजुर्ग वहां जाने से डरते हैं। इसका कोई समाधान नहीं हो पा रहा है।
नुमाइश के चलते शाम की बसों का संचालन सारसौल बस अड्डे से किया जा रहा है। वहीं मथुरा की बसें रोक दी जाती हैं। इसीलिए चालक गांधीपार्क गोल चक्कर से घूमाकर यात्रियों को बैठा रहे हैं। अमर उजाला के संज्ञान पर यात्रियों की सुविधा के लिए जल्द ही कोई कदम उठाएंगे।
- वीके शुक्ला, एआरएम अलीगढ़ डिपो