राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जन्म एक दिसंबर 1886 को हुआ था। वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस की मुरसान रियासत के राजा थे। जाट परिवार से ताल्लुक रखने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह की गिनती अपने क्षेत्र के पढ़े-लिखे लोगों में होती थी। उनका विवाह जिंद रियासत की बलबीर कौर से हुआ था। उनकी बरात के लिए हाथरस से संगरूर के बीच दो विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं।
पहली निर्वासित सरकार बनाई, भारतीय पासपोर्ट तक नहीं था
राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने 50 से ज्यादा देशों की यात्रा की थी। इसके बावजूद उनके पास भारतीय पासपोर्ट नहीं था। उन्होंने अफगान सरकार के सहयोग से 1 दिसंबर 1915 को पहली निर्वासित हिंद सरकार का गठन किया था। आजादी का बिगुल बजाते हुए वह 31 साल आठ महीने तक विदेश में रहे।
हिंदुस्तान को आजाद कराने का यह देश के बाहर पहला प्रयास था। अंग्रेज सरकार से पासपोर्ट मिलने की बात संभव ही नहीं थी। उनके पास अफगानिस्तान सरकार का पासपोर्ट था। राजा महेंद्र प्रताप की आत्मकथा 'माय लाइफ स्टोरी' को संपादित करने वाले डॉ. वीर सिंह के मुताबिक, राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने हिंदुस्तान छोड़ने से पहले देहरादून के डीएम कार्यालय के जरिए पासपोर्ट बनवाने का प्रयास किया था, लेकिन एक अखबार में जर्मनी के समर्थन में एक लेख लिखने के कारण पासपोर्ट बनाने में बाधा पैदा हुई थी।
इसके बाद राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने समुद्र मार्ग से ब्रिटेन पहुंचने की योजना बनाई। बाद में उन्होंने स्विट्जरलैंड, जर्मनी, सोवियत संघ, जापान, चीन, अफगानिस्तान, ईरान, तुर्की जैसे देशों की यात्रा की। 1946 में वे शर्तों के तहत हिंदुस्तान वापस आ सके।