बयान मीडिया में आने के बाद वर्ग विशेष के लोगों ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है, जिसकी शुरुआत जामिया से हुई। हमला होने पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। प्रॉक्टर की अनुमति के बावजूद जामिया के प्रिंसिपल ने यह बयान दिया कि हमने पुलिस को कैंपस के अंदर घुसने की अनुमति नहीं दी थी।
इस घटना के बाद एएमयू सहित हिंसा की आग पूरे देश में फैली और इसमें कुछ खास चैनलों ने आग को हवा दी। वादी स्वयं लोगों को कानून के विषय में समझाता फिर रहा था। इसी बीच 18 दिसंबर की शाम कचहरी से लौटते समय नामजद साबिर, अज्जू व उनके साथियों ने घेर लिया और मारपीट की। हमलावर होते हुए उन पर गोली चलाई, जिसमें वह बाल-बाल बच गए।
थाने में तहरीर देने भी गया, मगर पुलिस ने सुनवाई नहीं की। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में मुकदमा दर्ज करने का अनुरोध किया है। चूंकि, इस मामले से कई बड़े लोगों के नाम जुड़े हैं तो इस याचिका को एसीजेएम प्रथम के पास से सीजेएम को ट्रांसफर किया गया है। अब इस प्रकरण की सुनवाई 24 जनवरी को होगी।