अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कश्मीर के छात्रों ने जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल का विरोध किया। यह भी संकल्प लिया कि असंवैधानिक फैसले का विरोध करते रहेंगे, लेकिन संयम बनाए रखेंगे। दो दिन पहले दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन में कुछ छात्र शामिल हुए थे। दिल्ली की चिंगारी एएमयू में पहुंचने की आशंका जताई जा रही थी, जो सही साबित हुई।
सोशल मीडिया में बुधवार की शाम छह बजे जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल के विरोध में जनसंवाद के आयोजन की सूचना आने के बाद कैंपस में खलबली मच गई थी। जिला प्रशासन और एएमयू के प्रॉक्टोरियल टीम के सदस्य चौकन्ना हो गए। यूनिवर्सिटी सर्किल पर आरएएफ और पुलिस के जवान पहले से ही तैनात हैं। एसीएम द्वितीय अंजुम भी पहुंच गई।
छात्रों को समझा बुझाकर कार्यक्रम को रोकने का प्रयास तो हुआ, लेकिन प्रॉक्टोरियल टीम को कामयाबी नहीं मिली। शाम साढ़े छह बजे कश्मीर के 50 से अधिक छात्र मौलाना आजाद लाइब्रेरी स्थित कैंटीन के पास पहुंच गए। वहां पहले से ही मौजूद प्रॉक्टोरियल टीम के सदस्यों ने समझाने का प्रयास किया कि ऐसा कोई कार्य नहीं करें जिससे एएमयू की छवि धूमिल हो।
छात्रों ने जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल का विरोध तो किया, लेकिन किसी तरह के नारे या प्रदर्शन आदि नहीं किए। प्रॉक्टर प्रो. अफीफुल्लाह खान से छात्रों ने परिजनों से बात नहीं होने और पैसा आदि की दिक्कत होने की जानकारी दी। अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि एएमयू और जिला प्रशासन आपके साथ है। किसी तरह की दिक्कत हो तो अवगत कराएं। उसे दूर किया जाएगा।
सुरक्षा को लेकर भी आश्वस्त किया गया। प्रॉक्टर का कहना है कि छात्रों ने न तो नारे लगाए और न ही किसी तरह का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी समस्याएं जरूर हमलोगों के सामने रखीं।