राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में होने वाली शिकायतों में इंसाफ मिलने में लंबा वक्त लग रहा है। कारण ये है कि प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच पड़ताल की रिपोर्ट आयोग तक समय से नहीं पहुंच रही है। ताजा मामला अलीगढ़ में कुपोषण से जान गंवाने वाले बच्चों की सुनवाई का है, जिसमें शिकायत आयोग तक पहुंचने के सात महीने बाद एसडीएम कोल को जांच सौंपी गई है।
पवन तिवारी निवासी मंडी तितिरी तहसील जनपद बागपत ने आयोग में अलीगढ़ में कुपोषण से ग्रसित बच्चों की मौत की शिकायत की थी। इस पर आयोग ने संज्ञान लिया और फरवरी 2021 में जिलाधिकारी को निर्देश जारी किया कि वह जांच करा कर अवगत कराएं। लेकिन सात महीने बाद भी इसकी जांच नहीं हो सकी थी । बीते दिनों जब सभी आयोगों की शिकायतों की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर एडीएम न्यायिक / एडीएम सिटी राकेश पटेल को सौंपी गई तो उन्होंने सभी फाइलों का अवलोकन किया। जिसमें ये मामला भी था। उन्होंने इसकी जांच सोमवार को एसडीएम कोल को सौंप दी है। उन्होंने बताया कि मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
पवन तिवारी की आयोग को भेजी गई शिकायत के अनुसार क्वार्सी थाना क्षेत्र में पांच वर्ष की कुपोषित पुष्पा की पांच दिसंबर 2020 में मृत्यु हो गई थी। वह कुपोषित थी, इसके बाद भी उसे इलाज नहीं मिला। पुष्पा के परिवार का एक और बच्चा कुपोषित होने के साथ मधुमेह से भी ग्रसित था। उसे भी इलाज नहीं मिला। ऐसे और बच्च बताए गए। लॉकडाउन में उनकी स्थिति और खराब होने का जिक्र किया गया। इस पत्र में पवन ने मोहन लाल गौतम महिला चिकित्सालय में वर्ष 2020 के दौरान एसएनसीयू में सवा 11 महीने में 231 बच्चों की मौत पर भी सवाल उठाए थे। उसी अवधि में जेएन मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में 159 बच्चों की मौत का जिक्र था। इन गंभीर शिकायतों पर आयोग ने फरवरी 2021 में तत्कालीन जिलाधिकारी को जांच करने के लिए निर्देशित किया था। वर्तमान में जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे कार्यभार संभालने के बाद ऐसे सभी आयोग की शिकायतों और जांच की जिम्मेदारी एडीएम न्यायिक / एडीएम सिटी राकेश पटेल को सौंपी। सोमवार को एडीएम न्यायिक ने एसडीएम कोल को जांच के लिए कहा है। अब जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है।