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अलीगढ़ः जाटलैंड में चौधरियों का रहा दबदबा

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अभिषेक शर्मा
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विधानसभा चुनाव 2022 का बिगुल लगभग बज चुका है। सभी सियासी दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में अगर हम बात इगलास विधानसभा सीट की करें तो यह सीट इस बार के चुनाव में सुर्खियों में रहने वाली है, क्योंकि जाटलैंड के नाम से विख्यात अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर सत्ताधारी भाजपा ने एड़ी चोटी का जोर लगाया हुआ है और अन्य विपक्षियों ने भी दमखम लगा रखा है। इस सीट पर भाजपा अब तक सिर्फ तीन बार जीती है, जबकि इस सीट पर कुछ ‘चौधरी’ परिवारों का ही दबदबा रहा है।
इस सीट के इतिहास पर गौर करें तो जाटों और किसानों के बड़े नेता चौधरी चरण सिंह के बेहद करीबी चौ. शिवदान सिंह की संयुक्त बादशाहत शुरू से इस सीट पर रही। आजादी के बाद पहले चुनाव को छोड़ दें तो उसके बाद खुद शिवदान सिंह लगातार दो बार सीट से विधायक रहे। बाद में कांग्रेस के दिग्गज नेता मोहनलाल गौतम बरौली सीट छोड़कर यहां आए और उन्होंने शिवदान सिंह का टिकट कटवाकर खुद चुनाव जीता। इससे खफा चरण सिंह ने कांग्रेस से अलग होने के बाद इस सीट पर व्यक्तिगत रुचि ली और अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाकर मोहनलाल गौतम को हराया। उन्होंने शिवदान सिंह के पुत्र यानी उस दौर की सियासत में प्रदेश में मुख्यमंत्री के बाद सबसे ज्यादा ताकतवर मंत्री कहे जाने वाले चौ. राजेंद्र सिंह को चुनाव लड़ाया और वे लगातार चार बार इस सीट से विधायक रहे। बाद में उन्हें लोकदल का अध्यक्ष भी बनाया।
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चौ. चरण सिंह के देहांत के बाद जब राजेंद्र सिंह व चौ. अजित सिंह में दूरियां हुईं तो इस सीट पर कांग्रेस के युवा तुर्क चौ. बिजेंद्र सिंह ने कब्जा जमाया। इसी बीच, जाटों के दूसरे नेता चौ. मलखान सिंह भी इसी सीट पर भाग्य आजमाने उतरे। वे सपा से पहला चुनाव हारे तो भाजपा के टिकट पर 1996 का चुनाव जीते। करीब दो दशक तक इन दोनों नेताओं के परिवारों के बीच यह सीट रही। हालांकि, एक मध्यावधि चुनाव चौ. चरण सिंह की बेटी व उप चुनाव में बसपा के मुकुल उपाध्याय के जीतने के कारण यह सीट इन दोनों परिवारों से बाहर हो गई। सीट के आरक्षित होने के बाद जाट नेताओं का गणित गड़बड़ा गया है। 2012 में रालोद प्रत्याशी त्रिलोकीराम दिवाकर ने चुनाव जीता। 2017 व 2019 के उप चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की। वर्तमान में राजकुमार सहयोगी यहां से भाजपा विधायक हैं। सभी दलों की अपनी अपनी तैयारी है। प्रत्याशी सामने आने के बाद कुछ तस्वीर साफ होती दिखाई देगी।
इगलास सीट का इतिहास
1952 में निर्दल किशोरी रमन सिंह
1957 में निर्दल बाबू शिवदान सिंह
- उप चुनाव में निर्दल लीडर लख्मी सिंह
1962 में कांग्रेस से बाबू शिवदान सिंह
1967 में कांग्रेस से मोहनलाल गौतम
1969 में बीकेडी से गायत्री देवी पत्नी चौ. चरण सिंह
1974 में बीकेडी से चौ. राजेंद्र सिंह
1977 में जेएनपी से चौ. राजेंद्र सिंह
1980 में जेएनपी (एससी) से चौ. राजेंद्र सिंह
1985 में लोकदल से चौ. राजेंद्र सिंह
1989 में कांग्रेस से चौ. बिजेंद्र सिंह
1991 में लोकदल से डॉ. ज्ञानवती पुत्री चौ. चरण सिंह (मध्यावधि चुनाव)
1993 में कांग्रेस से चौ. बिजेंद्र सिंह
1996 में भाजपा से चौ. मलखान सिंह
2002 में कांग्रेस से चौ. बिजेंद्र सिंह
2004 में बसपा से मुकुल उपाध्याय (उप चुनाव)
2007 में रालोद से चौ. विमलेश सिंह पत्नी मलखान सिंह
2012 में रालोद से त्रिलोकीराम दिवाकर
2017 में भाजपा से राजवीर सिंह दिलेर
2019 में भाजपा से राजकुमार सहयोगी (उप चुनाव)
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