जिस घर में खाने पीने के लाले पड़ रहे थे। भर पेट खाना न मिलने के कारण 13 वर्ष की बेटी अनुराधा की तबीयत खराब रहने लगी। धीरे-धीरे परिवार के सभी सदस्य बीमारी की चपेट में आने शुरू हो गए। देखते ही देखते कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दे दी और फिर से लॉकडाउन हो गया।
जिसके चलते अजय को जो थोड़ी बहुत मजदूरी मिल जाती थी वह भी बिल्कुल बंद हो गई। गुड्डी व अजय का कहना है कि पिछले 2 महीने से भरपेट खाना नसीब नहीं हो सका है। क्योंकि परिवार के सभी सदस्यों को बुखार व अन्य बीमारियों ने घेर लिया। जिसके चलते घर से निकलना बंद हो गया।
आस-पड़ोस के लोग जो भी दे देते उसी से काम चला लिया करते थे। बाकी पानी पीकर सो जाया करते। नौबत यहां तक आ गई कि पिछले 10 दिनों से रोटी नहीं खाई। गुड्डी के मुताबिक, इसकी जानकारी उसकी बड़ी बेटी जिसकी शादी हो चुकी है। उसको हुई तो उसके पति ने पूरे परिवार को मलखान सिंह जिला अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि बेटी दामाद की भी माली हालात ठीक नहीं है।
वहीं, मलखान सिंह जिला अस्पताल की इमरजेंसी इंचार्ज डॉ. अमित को जानकारी हुई कि पिछले काफी वक्त से भूखी एक महिला व उसके 5 बच्चे वार्ड नंबर आठ में भर्ती कराए गए हैं। तो उन्होंने वहां विजिट करके सभी का हाल चाल जाना और ट्रीटमेंट अपने हिसाब से कराना शुरू करा दिया है।
परिवार को भी आश्वस्त किया है कि कोई भी जरूरत हो उनसे संपर्क कर लें। वहीं डॉक्टर अमित ने बताया कि परिवार के सभी सदस्यों की हालत ठीक नहीं है। जिनमें से अनुराधा समेत 3 बच्चों की हालत गंभीर स्थिति में है। हालांकि जल्दी ही उन्हें रिकवर कर लिया जाएगा।
वहीं, हैंड फॉर हेल्प एनजीओ को इसकी जानकारी हुई तो उसके सदस्य भी मदद के लिए अस्पताल पहुंच गए। एनजीओ के सुनील का कहना है कि वह भी हर संभव मदद देने की कोशिश कर रहे हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन ने की मदद की अपील
जो भी सहयोगी इस परिवार की मदद करना चाहे वह अमर उजाला फाउंडेशन के जरिये मदद कर सकता है। अमर उजाला फाउंडेशन ने लोगों से अपील की है। फाउंडेशन लगातार परिवार पर निगरानी बनाए हुए है।