जिले के पिछड़ा वर्ग के गरीब छात्र-छात्राओं का शहर के सरकारी विद्यालयों के छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करने का सपना अधूरा है। पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय ने जिले के राजकीय इंटर कॉलेजों व डिग्री कॉलेजों में हॉस्टल निर्माण के लिए 11 माह पहले आवेदन मांगे थे। लेकिन संबंधित कॉलेजों के प्रधानाचार्यों ने न कोई रुचि दिखाई और न ही आवेदन किया है। इसके चलते योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
जनवरी 2021 में प्रदेश सरकार ने पिछड़ा वर्ग के ऐसे मेधावी छात्र-छात्राएं, जो 10 वीं कक्षा पास कर चुके हैं या व उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उन्हें हॉस्टल सुविधा देने का निर्णय लिया था। इनमें अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के अलावा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को रहने की सुविधा देने का भी प्रस्ताव था। हॉस्टल निर्माण के बाद छात्राओं व महिलाओं को वरीयता के आधार पर हॉस्टल सुविधा प्रदान देनी थी। योजना के तहत इन छात्रावासों में छात्र-छात्राओं के खाने, खेलने-कूदने के अलावा मनोरंजन के साधन भी उपलब्ध कराए जाने थे।
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने जिले के सभी राजकीय इंटर कॉलेजों व डिग्री कॉलेजों से हॉस्टल निर्माण के लिए जनवरी में आवेदन मांगे थे। कई बार रिमांइडर भी भेजे गए। लेकिन प्रधानाचार्यों ने रुचि नहीं दिखाई। इसके चलते इन कॉलेजों में छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ रहा है। संवाद
राजकीय इंटर कॉलेज - 34
एडेड कॉलेज - 94
राजकीय डिग्री कॉलेज - 06
आईटीआई - 01
शासन स्तर से हॉस्टल निर्माण के लिए प्रस्ताव मांगा गया था। कई बार संबंधित कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को पत्र भेजकर प्रस्ताव व आवेदन भेजने का आग्रह किया गया था। लेकिन अब तक कोई आवेदन नहीं मिला है। फिर से प्रयास किए जाएंगे।
- मनीष कुमार, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी