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हिंदी हैं हमः मातृभाषा का सम्मान, हिंदी ने बढ़ाई मेरिट में शान

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हिंदी हमारी मातृभाषा है, हम उसका सम्मान करते हैं। हिंदी विषय कठिन नहीं है। बस आपको मूल सिद्धांतों व व्याकरण पर ध्यान देना होगा। ऐसा करके हिंदी विषय में सर्वाधिक अंक हासिल किए जा सकते हैं। इसमें शिक्षकों का सही मार्गदर्शन होना चाहिए। साथ ही मुहावरे, लोकोक्ति, शब्द शैली सीखने के लिए प्रतिदिन अभ्यास करना पड़ेगा। सीबीएसई दसवीं के जिला टॉप तीन स्थान पर काबिज छात्र-छात्राओं ने 100 नंबर तक हासिल किए। इन्हीं नंबरों ने उन्हें जिले का टॉपर बनाया। उनका कहना है कि हिंदी सहज और सरल भाषा है। अभिव्यक्ति भी आसान है।
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रैंक नाम अंक प्रतिशत हिंदी में नंबर विद्यालय का नाम
1 अक्षत भारद्वाज 99.5 100 संत फिदेलिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल
2 कृष्ण कुमार 99.3 99 बाबूजी कान्वेंट स्कूल जट्टारी
2 ध्रुवी वार्ष्णेय 99.3 98 ओएलएफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल
3 अरुण राजपूत 99.2 99 संत फिदेलिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल
जिला टॉपर बोले
मातृभाषा में विचारों का आदान-प्रदान सहज होता : अक्षत
- स्वर्णजयंती नगर के गैलेक्सी टावर निवासी अक्षत भारद्वाज ने सीबीएसई दसवीं में 99.5 प्रतिशत अंक लाकर जिला टॉप किया है। हिंदी विषय में अक्षत को 100 में से 100 नंबर मिले हैं। उन्होंने बताया कि उनकी मेरिट बढ़ाने में हिंदी विषय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुहावरे, लोकोक्ति, शब्द शैली सीखने के लिए प्रतिदिन अभ्यास करना होता है। इस कार्य में उनकी शिक्षिका नीलम श्रीवास्तव ने काफी मदद की और उसी का परिणाम है कि हिंदी विषय में उन्हें 100 में से 100 नंबर मिले। अन्य विषयों में अलग से कक्षाएं लेते थे, लेकिन हिंदी में दोबारा कक्षा लेने की जरूरत नहीं पढ़ी। अक्षत ने बताया कि उन्हें हिंदी में कहानियां पढ़ना पसंद हैं। मातृभाषा हिंदी का सम्मान करते हैं। मातृभाषा में विचारों का आदान-प्रदान करना सरल और सहज होता है।
अधिक से अधिक नंबर लाने में सहायक है हिंदी : ध्रुवी वार्ष्णेय
- ज्ञान सरोवर कॉलोनी निवासी ओएलएफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा ध्रुवी वार्ष्णेय ने 99.3 प्रतिशत अंक पाकर सीबीएसई दसवीं में जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। ध्रुवी के मुताबिक हिंदी विषय कठिन नहीं, बल्कि सरल है। हिंदी विषय में अधिक से अधिक नंबर लाना आसान है। ध्रुवी को हिंदी विषय में 100 में से 98 नंबर मिले हैं। ध्रुवी ने बताया कि स्कूल में हिंदी की शिक्षिका अर्शी लोधी और सरिता वार्ष्णेय इतने रोचक ढंग से पढ़ाती थीं कि उत्सुकता बनी रहती थी। हमेशा नया जानने के लिए मन करता था। यही कारण रहा कि हिंदी विषय के नंबर उनकी मेरिट बढ़ाने में कारगर सिद्ध रहे। ध्रुवी ने कहा कि हमारी मातृभाषा हिंदी है, इसीलिए हमें सही हिंदी बोलने के लिए नियमित अध्ययन करना चाहिए। मातृभाषा में पाठ्यक्रम होने के कारण जल्दी समझ में आता है।
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मातृभाषा की वजह से हिंदी से है बेहद लगाव : कृष्ण कुमार
- बाबूजी कान्वेंट स्कूल, जट्टारी के छात्र कृष्ण कुमार ने भी 99.3 प्रतिशत अंक लाकर जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। कृष्ण कुमार के मुताबिक, मातृभाषा की वजह से हिंदी से लगाव है। भविष्य में मैकेनिकल इंजीनियर बनना चाहते हैं। अगर इसकी पढ़ाई हिंदी में कराई जाए तो निश्चित ही सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने बताया कि हिंदी विषय का पाठ्यक्रम सरल नहीं था, मगर शिक्षक लोकेंद्र कुमार ने पाठ्यक्रम को समझाने में कसर नहीं छोड़ी। कृष्ण कुमार का मानना है कि हिंदी के लिए सही मार्गदर्शन भी जरूरी है, क्योंकि क्षेत्रीय भाषा से हिंदी की बोली पर काफी प्रभाव पड़ता है। हिंदी के साथ आजकल लोग हिंग्लिश को बोलचाल की भाषा में लेकर आ गए हैं। अगर सभी की वर्तनी सुधार दी जाए तो हिंदी के लिए इससे बड़ा सम्मान कुछ नहीं होगा।
हिंदी में कुछ सीखना हमेशा प्रोत्साहित करता है : अरुण
- 99.2 प्रतिशत अंक लाकर जिले में तीसरा स्थान लाने वाले संत फिदेलिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र अरुण कुमार राजपूत का कहना है कि हिंदी में बोलना अच्छा लगता है। समाज में हो रहे निरंतर बदलाव की वजह से मिश्रण भाषा में बोलते हैं। कहीं हिंदी, कहीं अंग्रेजी और कहीं दोनों के मिश्रण से बने शब्दों को अपनी भाषा में शामिल कर लेते हैं। लेकिन केवल हिंदी में बोलने के लिए नियमित किसी के मार्गदर्शन में अध्ययन जरूरी है। अरुण ने कहा कि हिंदी में कहानियां पढ़ना अच्छा लगता है। हिंदी में कुछ सीखना हमेशा प्रोत्साहित करता है। अधिक नंबर लाने वाला विषय सरल नहीं, कठिन है। लेकिन नियमित पढ़ते रहें तो कठिन नहीं है। यही कारण है कि हिंदी में मिले 99 नंबर मेरिट बढ़ाने में काफी कारगर रहे।
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