परिवार के सदस्य जगदीश शर्मा ने बताया कि एक दिन मोती घर के बाहर खेल रहा था, तभी अन्य कुत्तों ने उसे बुरी तरह दबोच लिया। मुश्किल से छुड़ाया, पर उस घटना के बाद मोती के दिल में डर बैठ गया। वह गुमशुम रहने लगा। आखिरकार 10 सितंबर 2023 को मोती ने दुनिया से अलविदा कह दिया। परिवार में मातम छा गया। मोहल्ले, आसपास में जिसे भी मोती के मौत की खबर मिला, वह स्तब्ध रह गया। मोती परिवार के सदस्यों को रोता-बिलखता छोड़ गया।
हवन, तेरहवीं के भोज से दी मोती को घर से विदाई
मोती की मौत के बाद उसे दफनाते हुए परिवार के सदस्यों के आंसू नहीं रूक रहे थे। उसके बाद बरकटा हुआ। सात दिन के बाद मोती का त्रयोदशी संस्कार किया गया। सुबह मोती की आत्मा की शांति के लिए आचार्य सुरेंद्र शास्त्री ने मंत्रोच्चार के साथ हवन कराया गया। हवन में मोती की तस्वीर याद के रूप में रखी थी। हवन में परिवार, रिश्तेदार और आस पड़ोस के लोग शामिल हुए। हवन का प्रसाद मोती की पसंद का सूजी का हलवा था। हलवा बादाम, मेवा डालकर तैयार किया गया था। तेरहवीं के भोज में सबसे पहले 13 ब्राह्मणों को भोज कराया गया। जिसके बाद उन्हें जग, सुंदर कांड की पुस्तक, बिस्कुट, नमकीन और पापे के साथ धन दान किया। भोज में भी मोती के पसंद वाले खाद्य पदार्थों को तरजीह दी गई। भोज में खस्ता कचौडी, पूड़ी, आलू की सब्जी, रायता, हलवा था। सभी ने भोज में प्रसाद ग्रहण किया। इस तरह मोती को विदाई दे गई।
मोती को पसंद थी शर्मा जी की आइसक्रीम
परिवार के बुजुर्ग महादेव प्रसाद ने बताया कि मोती को नौरंगाबाद में शर्मा जी की दुकान वाली आइसक्रीम बहुत पसंद थी। मोती वह आइसक्रीम बड़ी चाव से खाता था। एक नहीं दो, तीन तक खा जाता था। मोती पूरी तरह से शाकाहारी था, वह खस्ता कचौड़ी, आलू की सब्जी, मूंग की दाल, काशीफल और आलू की सब्जी, रायता, पापे, बिस्कुट, नमकीन बड़े चाव से खाता था।
हवन और तेरहवीं में रखे गए मोती के चित्र को उसकी मां मल्लो पूरे समय देखती नजर आई, पर उसे एहसास हो गया था कि अब उसका लाल एक याद है और वह पास नहीं आ पाएगा। पूरे त्रयोदशी संस्कार में मां मल्लो वहीं पर बैठी रही और अपने बेटे की विदाई को आंसू भरी आंखों से देखती रही। मल्लो को वहां जिसने भी देखा, उसकी आंखें भी भर आईं।
तेरहवीं में ये हुए शामिल
मोती की तेरहवीं में प्रथम शर्मा, करिश्मा, ज्योति, कुमकुम शर्मा, नीतू शर्मा, रूद्र, नरेंद्र शर्मा, रजनी शर्मा, साधना शर्मा, मानसी शर्मा के साथ रिश्तेदार, मोहल्ले वाले भी तेरहवीं में शामिल हुए। सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।