इस मुकदमे में पुलिस चार्जशीट में कुल 23 गवाह शामिल किए गए थे। जिनमें से अदालत में 12 गवाह पेश किए गए। डीजे-8 की अदालत में इस मुकदमे का ट्रायल वर्ष 2018 में शुरू हुआ। एडीजीसी बताते हैं कि मुकदमे में कुल 23 गवाह चार्जशीट में शामिल थे, जिनमें से कुल 12 गवाह पेश किए गए। एडीजीसी के अनुसार अदालत ने इंस्पेक्टर की लापरवाही विवेचना के दौरान घटना के डेढ़ माह बाद घटना के घायलों के बयान दर्ज करना माना है। इसी आधार पर कार्रवाई के लिए लिखा गया है।
एक साथ होनी थीं उस समय जिले में कई हत्याएं
इस हत्याकांड की सबसे खास बात है कि शरद व उसके बाद उसके साथी जीतू की हत्या के बाद जब शूटरों की गिरफ्तारी हुईं तो उजागर हुआ कि जिले में कई हत्याएं होनी थीं। मगर दो हत्याओं के बाद ही शूटर पकड़े गए। ये सभी शूटर उस समय के जिले के एक विधायक के आवास के बराबर वाले फ्लैट में ठहरे थे, जिसे फरारी हाउस नाम दिया गया था।
सन 2010 के आसपास रंगबाजी में शुरू हुई गैंगवार में कई पढऩे-लिखने वाले नवयुवक अपराधी बन गए। कई की जान चली गई। सबसे पहले विनय कटियार हत्याकांड को लेकर दो गुटों में बंटे नवयुवकों के इस गैंग को पुलिस ने बाइकर्स गैंग का नाम दिया। इसके बाद दोनों ओर से हत्याओं और हमलों का क्रम चला। इस कांड में अब तक कुल सात हत्याएं हुई हैं, जिसमें यह पहला मुकदमा है, जिसमें निर्णय हुआ है। 2010/11 में बाइकर्स गुटबाजी में विनय कटियार की हत्या हुई। दो गुटों में बंटे ग्रुप के लोग दो साल बाद 2012 में दोबारा आमने-सामने आ गए। इस दौरान कपिल उर्फ लाला की हत्या हुई। चार साल बाद 2016 में कपिल के पिता की भी हत्या कर दी गई।
कपिल के पिता की हत्या भी गैंगवार का ही नतीजा बताई गई। फिर अंकित चौधरी उर्फ बीनू कालिया, जो विनय कटियार की मौत में नामजद था। वो जमानत पर बाहर आ गया था। नवंबर 2014 को बीनू कालिया की हत्या की गई। कपिल की मौत का बदला लेने की गरज से इसी ग्रुप के सुमित सपेरा के भाई की शादी में शरद गोस्वामी दोस्तों के साथ आया था, जहां उसे मौत के घाट उतारा गया। इस दौरान मौके पर कारतूस के 50 खोखे बरामद हुए थे। इस घटना के एक माह के अंतराल में ही शरद ग्रुप के जीतू चौधरी की हरदुआगंज में हत्या हुई। इसके बाद तत्कालीन विधायक के करीबी धीरा ठाकुर की 2017 में मैरिस रोड चौराहे पर हत्या की गई। इन हत्याओं के अलावा कई अन्य हमले भी हुए। मगर यह पहला मुकदमा है, जो निर्णय की दहलीज पर पहुंचा है।
इस घटना में बाइकर्स के विपक्षी गुट के सरगना सजल चौधरी व उसके साथियों की गिरफ्तारी उस समय के एक विधायक के आवास के पास से हुई थी, जिसे फरारी हाउस नाम दिया गया था। सजा पाने वाला दूसरा गैंग सरगना तभी से जेल में है। गिरफ्तारी के समय शूटरों से पुलिस ने एक डायरी बरामद की थी, जिसमें शरद के कुछ करीबियों व साथियों के नाम पते, मोबाइल नंबर तक अंकित थे। शूटरों ने स्वीकारा था कि इन सभी की क्रमवार हत्या होनी थी। मगर शरद व जीतू की हत्या के बाद वे पकड़े गए। शूटरों में देवेंद्र उर्फ बेबी मुख्य किरदार है, जो अभी फरार है।
शरद व जीतू की हत्या में जेल जाने के बाद बेबी का नाम हरदुआगंज में सपा नेता विजेंद्र यादव की हत्या में आया था। उसमें भी पुलिस ने उसे तलाशा। मगर वह लंबे समय से फरार है और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर जिले में अक्सर घूमते देखा जाता रहा है।
एक दौर में था रामघाट रोड पर बाइकर्स का खौफ
ये वो दौर था, जब बाइकर्स कहीं भी कुछ भी कर जाते थे। पुलिस तक उन्हें नहीं रोक पाती थी। विनय कटियार की हत्या से पहले सीओ सिविल लाइंस से नोकझोंक, विनय कटियार की हत्या के दिन रामघाट रोड पर प्रतिशोध में उत्पात मचाना, क्वार्सी थाने के बाहर खड़ी लेपर्ड पर हमला से लेकर सजल के घर पहुंचकर उसके भाई पर हमले की घटना हुई। इसके बाद का आलम ये था कि दोनों गुटों के बाइकर्स के सामने कोई पड़ता नहीं था। मगर विनय की हत्या के बाद तत्कालीन एसएसपी सतेंद्रवीर सिंह और फिर शरद व जीतू की हत्या के बाद तत्कालीन एसएसपी जे रविंद्र गौड़ ने इस गैंग के खिलाफ अभियान चलाया। तब से माहौल कुछ सामान्य हुआ और दोनों गैंग भी शांत हैं। अब इनके सदस्य या तो जेल में हैं या अपराध से तौबा कर परिवार के साथ हैं।
मुख्य बिन्दु
- कुल 11 आरोपियों पर दाखिल थी चार्जशीट, एक की मौत, दो बरी, एक है कोर्ट से फरार
- हाईकोर्ट ने इस हत्याकांड में दिए थे जल्द निस्तारण के निर्देश, दो वर्ष पहले पूरी हुई गवाही
- विवेचना में विवेचक स्तर से नहीं दिखाई गई गंभीरता, एसएसपी के जरिये आईजी को लिखा गया
घटनाक्रम एक नजर में
- 3 मार्च 2016 की देर शाम 9 बजे हुई वारदात।
- 4 मार्च को पोस्टमार्टम, शरद के 4 गोलियां आर-पार थीं।
- अप्रैल माह के मध्य में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
- 12 जून 2016 को सभी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल।
- 3 जुलाई 2018 से अदालत में ट्रायल है जारी।
- 2022 में मुकदमे में गवाही पूरी हुईं, अब निर्णय आया।