डॉ. हमजा ने कहा कि गाइडलाइन के हिसाब से जब एफएसएल की रिपोर्ट अप्रासंगिक है तो एमएलसी के परीक्षण की बात और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आए संकेत को एक साथ जोड़कर निष्कर्ष निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई है, उसमें साफ है कि पीड़िता का हाइमन क्षतिग्रस्त होने के बाद घाव ठीक हो जाना पाया गया है।
घटना 14 सितंबर की थी और पोस्टमार्टम 29 सितंबर को हुआ। जबकि हाइमन का घाव ठीक होने के लिए 7 से 10 दिन काफी हैं। एमएलसी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्यों को एक साथ देखें तो दुष्कर्म की बात स्पष्ट हो जाती है।
जांच एजेंसियों को हम सारे तथ्य बता रहे हैं: प्रिंसिपल
जेएन मेडिकल कॉलेज की एमएलसी रिपोर्ट के संबंध में प्रिंसिपल प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि वह रिपोर्ट के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। हाथरस प्रकरण की जांच कर रही एजेंसियों को वह सारे तथ्यों से अवगत करा रहे हैं। जांच एजेंसियों के अलावा अन्य किसी संस्था या एजेंसी से वह इस संबंध में कोई बात नहीं कर सकते हैं।