गुलजार देहलवी के साथ शायर जॉनी फास्टर।
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मशहूर शायर पंडित आनंद मोहन जुत्शी गुलजार देहलवी के निधन पर उनके साथ मंच साझा कर चुके अलीगढ़ के शायरों में भी शोक की लहर है। उनके साथ कई मंचों पर गजल पढ़ चुके मशहूर शायर जॉनी फॉस्टर कहते हैं कि गुलजार साहब अपने आप में अदब का एक इदारा थे। जब वह नुमाइश में एक बार मुशायरे आए तो वह दो घंटे मेरे घर पर भी रुके।
मेरे लिए कुछ शब्द भी कहे। वह शब्द मेरे लिए एक सनद की तरह बनकर रह गए हैं। वह कई दशकों तक अलीगढ़ की नुमाइश में हुए मुशायरे की शान रहे हैं। इसी तरह उनके साथ मंच साझा कर चुकी शायरा रिहाना शाहीन कहती हैं कि आज उर्दू अदब ने अपना एक सितारा खो दिया है। उर्दू का एक खिदमतगार होने के साथ-साथ वह एक सेक्युलर मिजाज के इंसान भी थे। उनकी भरपाई कभी भी नहीं की जा सकती। गजलकार सुरेश कुमार कहते हैं वह उर्दू की उस धारा के विद्वान थे जिसमें नुक्ते की भी गलती की गुंजाइश नहीं होती है। उनके सामने उर्दू के नुक्ते में भी बदलाव करना अदब के खिलाफ गुस्ताखी करने जैसा होता था।