भारत माला प्रोजेक्ट के तहत अलीगढ़ कानपुर हाईवे का निर्माण रफ्तार पकड़ गया है। अलीगढ़ के बौनेर से भदवास तक लगभग 46 किमी लंबे हाईवे का 44 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो गया है। एक हजार करोड़ के इस हाईवे की चौड़ाई लगभग 26 मीटर है। इसको मार्च 2022 का पूरा करने का लक्ष्य तय है। कई जगह पर इस रोड का डामरीकरण हो रहा है। इस रोड का एक साइड का काम 70 फीसदी तक पूरा किया जा रहा है, जिससे एक तरफ से यातायात संचालित हो सके। दूसरी साइड से तीस फीसदी काम पूरा हो रहा है।
हाइब्रिड एनोटी मोड से बढ़ी रफ्तार
अभी तक ज्यादातर हाईवे डीबीएफओटी (डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट, ट्रांसफर) पैटर्न पर बन रहे थे, जिसमें रोड बनाने वाली कंपनी सारा पैसा लगा कर टोल प्लाजा से इसकी वसूली करती थी। इसमें 25 से 30 साल तक डेवलपर टोल टैक्स वसूलता है। इसके बाद हाईवे को नेशनल हाईवे अथारिटी को स्थानांतरित कर दिया जाता था। पूर्व में गाजियाबाद-अलीगढ़ जीटी रोड इसी पैटर्न पर बना था। कई बार कुछ काम लेट होने पर टोल नहीं वसूला जा सकता है, तो डेवलपर को नुकसान होता था। ऐसे में हाईवे निर्माण की रफ्तार कम रहती थी।
हाइब्रिड एनोटी मोड पर केंद्र सरकार निर्माण कार्य का चरणबद्ध तरीके से भुगतान करती रहती है तो डेवलपर पर आर्थिक बोझ कम रहता है। जिससे हाईवे का निर्माण तेजी से पूरा होता जाता है। इसमें सरकार 40 प्रतिशत पैसे का भुगतान करती रहती है। जिसकी वसूली एनएचएआई खुद टोल लगाकर करता है और 15 साल तक हाईवे का रखरखाव भी करता है। हाइब्रिड एनओटी मोड लागू होने के बाद हाईवे तेजी से बन रहे हैं। भारत माला योजना के तहत बन रहे अलीगढ़ कानपुर हाईवे में इस पैटर्न को लागू किया गया है।
हाईवे का निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। एक साइड से 70 फीसदी कार्य पूरा कर यातायात को व्यवस्थित करने का प्रयास जारी हैै। साथ ही दूसरी तरफ का निर्माण कार्य भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।
- अमित सारस्वत, प्रोजेक्ट मैनेजर अलीगढ़ कानपुर जीटी रोड हाईवे (1)।