महिला की मौत की सूचना पर जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र लोधी गांव औरेनी दलपतपुर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। पुष्पेंद्र लोधी ने बताया कि दो दिन पहले ही उन्होंने एडी हेल्थ डॉ. साधाना राठौर से दो बजे के बाद अस्पताल में डाक्टरों के नहीं रहने से लोगों को मिल रहीं बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की शिकायत की थी। जिसमें यह आशंका भी व्यक्त की थी कि रात के समय वार्ड में मरीज और प्रसूताएं भर्ती रहती हैं, उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। किसी के साथ कोई अनहोनी हो गई, तो जिम्मेदार कौन होगा?
उन्होंने कहा कि एक ही परिसर में 100 शैया युक्त संयुक्त चिकित्सालय व सीएचसी संचालित होने के बाद भी मरीजों को उपचार नहीं मिल रहा, तो इससे बड़ी बदहाली क्या होगी? उन्होंने आरोप लगाया कि यदि अस्पताल में डाक्टर मौजूद होते, तो महिला को तत्काल उपचार मिल जाता और उसकी जान बच सकती थी। मंडल की सबसे बड़ी अधिकारी अपर स्वास्थ्य निदेशक से शिकायत के बाद भी इस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं सुधर रहीं और आपातकालीन सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि इलाज के अभाव में जनता को ऐसे मरते नहीं देख सकते। यदि अस्पताल में आपातकाली सेवाएं शुरू कर 24 घंटे डाक्टरों के रहने का ड्यूटी शिड्यूल नहीं बना, तो अस्पताल में धरना प्रदर्शन करेंगे।
बिना महिला चिकित्सक के ही चल रहा लेबर रूम
सीएचसी में एक भी महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इसके बाद भी गर्भवती महिलाओं को भर्ती कर निचले स्तर के स्टाफ से प्रसव कराए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रसूताओं के लिए जोखिम भरा है।
सीएचसी में महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। अन्य अनुभवती स्टाफ प्रसव बेहद सावधानी से कराता है। अत्यधिक ब्लीडिंग होने पर प्रसूता को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था जहां उसकी मौत हुई है। इलाज में लापरवाही की बात गलत है। रात के समय मैं खुद ड्यूटी पर था लेकिन मुझे इस बारे में स्टाफ ने क्यों नहीं बताया उनसे जबाव तलब किया जाएगा।- डॉ. खालिद, सीएचसी प्रभारी