आगरा रोड पर गणेश की प्रतिमा पंसद करते लोग। संवाद
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गणपति स्वयं ही सिद्ध मुहूर्त हैं। सभी प्रकार के विघ्नहर्ता हैं । शुक्रवार (आज) गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणपति की प्रतिमा को पूरे दिन में कभी भी स्थापित कर सकते हैं। सकाम भाव से पूजा के लिए नियम की आवश्यकता पड़ती है। इसमें प्रथम नियम मुहूर्त के अनुसार कार्य करना है। अगर घर में गणपति प्रतिमा की स्थापना कर रहे हैं तो सुबह11:55 से 12:45 बजे के अभिजीत मुहूर्त में शुभ कार्य करने की योजना बनाएं। यह जानकारी श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने दी है।
हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन गणपति की पूजा दोपहर के समय करना अधिक शुभ माना जाता है। मान्यताएं हैं कि भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी में मध्याह्न के समय गणेश जी का जन्म हुआ था। मध्याह्न यानी कि दिन का दूसरा प्रहर। जो सूर्योदय के लगभग तीन घंटे बाद शुरू होता है। यह समय लगभग दोपहर 12 बजे से 12:30 तक रहता है। गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल में अभिजित मुहूर्त के संयोग पर गणेश भगवान की मूर्ति की स्थापना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। गृहस्थी परिवार सुबह 11:55 बजे से 12:45 तक अभिजीत मुहूर्त में गणपति की स्थापना करें। गली-चौराहे अथवा मोहल्लों में दिन में कभी भी प्रतिमा को स्थापित कर सकते हैं। वहीं बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के लिए बाजारों में पूजन सामग्री, मिठाई, दूध, मेवा, फल आदि की खरीददारी की।
आज निकलेंगी शोभायात्रा : आज शहर में जगह-जगह गणपति स्थापना की शोभायात्रा निकाली जाएंगी। श्रद्धालुओं ने डीजे साउंड सिस्टम विभिन्न वाहनों में लगाया है। गणपति को भी वाहनों में बैठाकर नगर भ्रमण कराया जाएगा। भजनों पर नाचते गाते श्रद्धालु अबीर भी उड़ाएंगे।