अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के विदेशी भाषा विभाग में फ्रेंच के साथ जर्मन और स्पेनिश भाषा भी कदमताल कर रही हैं। यहां पांच भाषाओं में तालीम दी जा रही है। रोजगार के लिए किसी एक भाषा में पारंगत होना मुफीद माना जा रहा है।
वर्ष 2015 में विदेशी भाषा विभाग की स्थापना हुई थी। पांच भाषाओं की पढ़ाई होती है। इनमें फ्रेंच, चाइनीज, जर्मन, रशियन और स्पेनिश भाषा शामिल है। फ्रेंच भाषा में विद्यार्थियों की रुचि ज्यादा रहती है। इसके बाद जर्मन, स्पेनिश भाषा को वरीयता दी जा रही है। चाइनीज की लिपि लोगोग्राम्स है, जो कठिन मानी जाती है, क्योंकि इसमें करीब पांच हजार लोगोग्राम्स होते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह भाषा कठिन है, लेकिन नौकरी के अवसर काफी हैं। स्नातक में हर भाषा पाठ्यक्रम में 20-20 सीटें हैं, जबकि परास्नातक में हर भाषा में 10-10 सीटें हैं। बीए ऑनर्स में 100 सीटों के लिए करीब 2500 हजार आवेदन आते हैं। मेरिट के आधार पर प्रवेश दिए जाते हैं। विभाग जब शुरू हुआ था, तब हर भाषा के लिए एक-एक शिक्षक थे, लेकिन अब हर भाषा को पढ़ाने के लिए तीन-तीन शिक्षक हैं।
एएमयू के स्कूल में भी विदेशी भाषा की पढ़ाई हो
जानकारों का कहना है कि अगर एएमयू के स्कूलों में विदेशी भाषा की पढ़ाई हो, तो उन्हें स्नातक में विदेशी भाषा का कोर्स करने में और सहूलियतें मिलेंगी। इस पर इंतजामिया को जरूर विचार करना चाहिए। उधर, विदेशी भाषा में पुर्तगाल, कोरियन और जापानी भाषा की भी पढ़ाई होनी चाहिए। इन भाषाओं में पारंगत होकर नौकरी हासिल की जा सकती है।
विदेशी भाषा में पारंगत होकर नौकरी आसानी हासिल कर सकते हैं। विदेशी भाषा के साथ एमबीए की डिग्री को नौकरी के लिहाज से एक सफल सामंजस्य माना जाता है। विदेशी भाषा का कोर्स करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाया जा सकता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी नौकरी के अवसर होते हैं। दोभाषिये और अनुवादक के रूप में भी जीवन में सफल हो सकते हैं।
-इकबाल अहमद, एसो. प्रोफेसर, विदेशी भाषा विभाग