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विदेश के शैक्षणिक संस्थान यूपी में खोल सकते हैं ऑफ कैंपस

Wed, 10 Nov 2021 12:39 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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ई लाइब्रेरी का फीता काटकर शुभारंभ करते उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा। - फोटो : Amar Ujala
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उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश बदल रहा है। सरकार चाहती है कि युवाओं को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिले। विदेश के शैक्षणिक संस्थान उत्तर प्रदेश में आकर ऑफ कैंपस खोल सकते हैं। सरकार संस्कृत का प्रचार-प्रसार कर रही है। नए संस्कृत निदेशालय की स्वीकृति हो चुकी है।
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सभी विद्यालयों में संस्कृत की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति का कार्य हो गया है। 2017 के पहले शिक्षा व्यवस्था माफिया के चंगुल में फंसी थी। प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश आए तो उन्होंने कहा था, यहां नकल के टेंडर उठते हैं। आज उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था माफिया के चंगुल से मुक्त है। परीक्षा कदाचार मुक्त हो रही है। निर्धारित समय पर परीक्षा होती है और परिणाम घोषित हो जाते हैं। मंगलवार को मथुरा रोड पर सिंघारपुर स्थित सीबी गुप्ता सरस्वती विद्यापीठ के वार्षिक समारोह को संबोधित कर रहे थे।




इससे पूर्व उप मुख्यमंत्री ने केशव सेवा धाम में विधायक निधि से निर्मित मां शारदा ई लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। अध्यक्षता सेवा भारती के सह संगठन मंत्री यतींद्र ने किया। इससे पूर्व कार्यक्रम को अतुल कृष्ण महाराज एवं सुनील कौशल ने संबोधित किया। वार्षिक समारोह में स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में सांसद सतीश गौतम, राजवीर सिंह राजू भैया, राजवीर दिलेर, विधायक अनिल पाराशर, ठाकुर रवेंद्रपाल सिंह, संजीव राजा, राजकुमार सहयोगी, अनूप प्रधान, ठाकुर जयवीर सिंह, डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, ठाकुर दलवीर सिंह, शशि सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी ऋ षिपाल सिंह, विवेक सारस्वत, डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. राजीव वार्ष्णेय, राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ आदि मौजूद थे।
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छात्रों में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना




उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर एवं विद्या भारती राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अंग हैं। यहां के छात्र राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना रखते हैं। यहां संस्कार एवं परंपराओं की शिक्षा मिलती है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्ववादी राष्ट्र से प्रेम करते हैं। देश के लिए प्राण न्योछावर करने के लिए तैयार रहते हैं। हिंदुत्ववादी खाने के पहले विश्व का कल्याण हो, प्राणियों में सद्भावना हो और मानव का कल्याण हो कहते हैं। यही हमारे संस्कार और परंपरा है। 
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