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अकराबाद कांडः सवालों में उलझा परिवार, नारको टेस्ट को नहीं तैयार

Sat, 23 Oct 2021 12:39 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अभिषेक शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़

सार

अकराबाद क्षेत्र में अनुसूचित जाति की युवती की हत्या के मामले में न्यायालय ने पुलिस द्वारा चिह्नित पांच गवाहों के नारको टेस्ट की अनुमति दे दी है। ये चिह्नित संदिग्ध गवाह कोई और नहीं, बल्कि परिवार के ही सदस्य हैं। मगर, परिवार नारको परीक्षण के लिए तैयार नहीं हो रहा है।
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मौत - फोटो : social media
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विस्तार
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अकराबाद क्षेत्र में अनुसूचित जाति की युवती की हत्या के खुलासे में लगातार पेच फंस रहा है। अब न्यायालय ने पुलिस द्वारा चिह्नित पांच गवाहों के नारको टेस्ट की अनुमति दे दी है। ये चिह्नित संदिग्ध गवाह कोई और नहीं, बल्कि परिवार के ही सदस्य हैं। मगर, परिवार नारको परीक्षण के लिए तैयार नहीं हो रहा है। हालांकि, पुलिस द्वारा न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद सीबीआई मुख्यालय से तारीख लेने से पहले उन सवालों की फेहरिस्त तैयार कर रही है, जिनके जवाबों पर पहले दिन से परिवार पुलिस को भटका रहा है ताकि घटना के सही खुलासे में आसानी हो सके। इधर, परिवार इस अनुमति के खिलाफ अपील करेगा।

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वाकया 9 सितंबर का है, जब दोपहर में युवती शौच के लिए गई और गायब हो गई। इसके अगले दिन उसकी लाश घर से करीब 500 मीटर दूरी पर बाजरे के खेत में मिली थी। पहले ही दिन से परिवार हत्या कर शव फेंके जाने का आरोप लगा रहा है। इस मामले में आंबेडकर पार्क पर धरना दिया गया और चंद्रशेखर रावण ने भी पहुंचकर परिवार का समर्थन किया। मगर, पुलिस की अब तक की जांच में शक की सुई परिवार के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आई।

इसी क्रम में इंस्पेक्टर की समीक्षात्मक रिपोर्ट और विवेचक सीओ बरला की जांच के निर्णय के आधार पर परिवार के पांच उन संदिग्ध गवाहों का नारको परीक्षण कराना तय किया गया, जिनके बयानों में विरोधाभास है। इसके लिए एडीजे विशेष न्यायालय एससीएसटी की अदालत में विवेचक ने अनुमति आवेदन किया। विशेष लोक अभियोजन चमन प्रकाश शर्मा के अनुसार इस अनुमति पर बहस के दौरान इन गवाहों के अधिवक्ता ने इसे मानवाधिकारों का हनन बताकर आपत्ति दर्ज कराई। मगर, न्यायालय ने उनकी इस आपत्ति को खारिज करते हुए विवेचक को नियमानुसार किसी निष्पक्ष एजेंसी से नारको परीक्षण (पॉलीग्राफी जांच) कराने के आदेश दिए हैं। आदेश में यह भी कहा है कि यह एमआरआई या सिटी स्कैन जांच की तरह है, इससे किसी तरह का स्वास्थ्य पर प्रभाव नहीं पड़ता।

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इधर, इस आदेश के मिलने के बाद पुलिस स्तर से सवालों की फेहरिस्त तैयार की जा रही है। इन सवालों की सूची सीबीआई मुख्यालय को भेजी जाएगी। साथ में न्यायालय का आदेश भी भेजा जाएगा। वहां से समय मिलने के बाद सभी को नियत समय पर जांच के लिए ले जाया जाएगा। हालांकि, इससे पहले नियमानुसार नारको परीक्षण के लिए परिवार की सहमति मिलना भी जरूरी है। इसके लिए पुलिस स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। अगर सहमति नहीं मिलती है तो विधिक राय लेकर आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।

इस मामले में न्यायालय से अनुमति तो मिल गई है। अभी परिवार नारको परीक्षण कराने के लिए तैयार नहीं है। अगर परिवार की सहमति नहीं मिलती है तो विधिक राय लेकर आगे कोई कदम उठाया जाएगा। अभी सवालों की फेहरिस्त भी तैयार की जा रही है।
-सुमन कनौजिया, विवेचक/सीओ बरला

ये हैं प्रारंभिक सवाल, जिनके नहीं मिले सही जवाब
दोपहर तीन बजे घर से निकली युवती को गांव के किसी व्यक्ति ने घर से खेत पर जाते समय तक क्यों नहीं देखा? घटना के समय या उससे पहले तक युवती की मोबाइल पर बातचीत जारी, मगर लोकेशन घर में ही क्यों? परिवार का एक सदस्य क्यों कहता है कि वह डेढ़ बजे के बाद घर पर नहीं था, जबकि लोकेशन घर पर थी? परिवार की दूसरी महिला सदस्य क्यों कहती है कि वह भी घर में नहीं थी, जबकि दूसरा सदस्य उसे घर पर ही बताता है? अगले दिन तक पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई? पुलिस को सूचना देने से पहले परिवार को ही युवती का शव उस स्थान पर कैसे मिल गया? परिवार के सभी सदस्यों के बयानों में एक दूसरे के बयानों को लेकर विरोधाभास? सहित एक दर्जन से अधिक सवाल हैं, जिनके सटीक जवाब पुलिस को नहीं मिल पा रहे हैं।
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