इधर, इस आदेश के मिलने के बाद पुलिस स्तर से सवालों की फेहरिस्त तैयार की जा रही है। इन सवालों की सूची सीबीआई मुख्यालय को भेजी जाएगी। साथ में न्यायालय का आदेश भी भेजा जाएगा। वहां से समय मिलने के बाद सभी को नियत समय पर जांच के लिए ले जाया जाएगा। हालांकि, इससे पहले नियमानुसार नारको परीक्षण के लिए परिवार की सहमति मिलना भी जरूरी है। इसके लिए पुलिस स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। अगर सहमति नहीं मिलती है तो विधिक राय लेकर आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।
इस मामले में न्यायालय से अनुमति तो मिल गई है। अभी परिवार नारको परीक्षण कराने के लिए तैयार नहीं है। अगर परिवार की सहमति नहीं मिलती है तो विधिक राय लेकर आगे कोई कदम उठाया जाएगा। अभी सवालों की फेहरिस्त भी तैयार की जा रही है।
-सुमन कनौजिया, विवेचक/सीओ बरला
ये हैं प्रारंभिक सवाल, जिनके नहीं मिले सही जवाब
दोपहर तीन बजे घर से निकली युवती को गांव के किसी व्यक्ति ने घर से खेत पर जाते समय तक क्यों नहीं देखा? घटना के समय या उससे पहले तक युवती की मोबाइल पर बातचीत जारी, मगर लोकेशन घर में ही क्यों? परिवार का एक सदस्य क्यों कहता है कि वह डेढ़ बजे के बाद घर पर नहीं था, जबकि लोकेशन घर पर थी? परिवार की दूसरी महिला सदस्य क्यों कहती है कि वह भी घर में नहीं थी, जबकि दूसरा सदस्य उसे घर पर ही बताता है? अगले दिन तक पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई? पुलिस को सूचना देने से पहले परिवार को ही युवती का शव उस स्थान पर कैसे मिल गया? परिवार के सभी सदस्यों के बयानों में एक दूसरे के बयानों को लेकर विरोधाभास? सहित एक दर्जन से अधिक सवाल हैं, जिनके सटीक जवाब पुलिस को नहीं मिल पा रहे हैं।