पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने यूआईडीएआई की साइट पर फिरोजाबाद की एक बैंक का एक्सेस हासिल किया हुआ था। आरोपी हाथ की जगह पर पैर की उंगलियों के निशान स्कैन करते थे। साथ ही आंखों की रेटिना को स्कैन करने से पहले मशीन उलट देते थे। आरोपी सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से लोन लेने के इच्छुक लोगों से संपर्क करते थे। आरोपियों ने कई जगहों पर एजेंट भी बना रखे थे। जांच में पता चला है कि आरोपी कार्ड बनाने के लिए बैन की गई मशीन का इस्तेमाल करते थे।
हर फर्जी कार्ड के लिए 5 से 10 हजार रुपये की वसूली
भंगेल स्थित दोनों जनसेवा केंद्र में हर फर्जी कार्ड बनाने के लिए 5 से 10 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। लोन और ग्राहक की क्षमता के अनुसार दस्तावेज का रेट तय किया जाता था। ज्यादा लोन लेने वालों से ज्यादा रकम वसूली जाती थी।