कुछ वर्षों में लोगों की जीवनशैली में काफी परिवर्तन आया है। इसकी वजह से फिजियोथेरेपी की भूमिका बढ़ गई है। किसी भी कारण से जीवन जीने की गुणवत्ता में कमी आई है तो फिजियोथेरेपी जरूरी है। इस स्वास्थ्य प्रणाली में लोगों का परीक्षण किया जाता है और उपचार प्रदान किया जाता है।
-डॉ. नीरज भारद्वाज, फिजियोथेरेपिस्ट।
ये बरतें सावधानी
गर्दन और रीढ़ की हड्डी को ठीक रखने के लिए सही मुद्रा का ध्यान रखें। नियमित रूप से व्यायाम करें, खान-पान स्वस्थ रखें। वजन को न बढ़ने दें। चारपाई, सोफा, खराब गद्दे आदि पर सोने से बचें। लंबे समय तक मोबाइल फोन का प्रयोग न करें, अपनी गर्दन को आराम देते रहें।
ऐसे करें बचाव
- बीच-बीच में गर्दन को घुमाते रहें।
- 2 से 10 डिग्री तक गर्दन झुकाकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करें।
- लेटकर मोबाइल देखने की बजाय सीधे बैठकर मोबाइल प्रयोग करें। बीच-बीच में आराम लेते रहें।
- बच्चों को मोबाइल, टेबलेट की बजाय मैदान में खेलने के लिए प्रेरित करें।
- बच्चों को अगर मोबाइल फोन की आदत लगेगी तो वे शारीरिक गतिविधियां नहीं करेंगे, जिससे मोटापा बढ़ेगा।
- बच्चों के साथ समय बिताएं, उनको बाहर घुमाने ले जाएं, उनको दौड़ आदि खेल खिलवाएं।