पांच से 12 साल तक के छोटे बच्चों के कोविड रोधी टीकाकरण की मंजूरी के बाद शिक्षकों में उत्साह का माहौल है। उनका कहना है कि टीका लगने बाद छोटे बच्चे सुरक्षा घेरे में आ जाएंगे। कोरोना के डर से उनकी पढ़ाई भी बाधित नहीं होगी और अभिभावक भी चिंतित नहीं रहेंगे। ऐसे में घरवालों को समझाया जाएगा कि वह बच्चों को टीका लगवाएं।
जनपद में 15 से 17 वर्ष के 257671 किशोरों के टीकाकरण लक्ष्य रखा गया है, जिसके सापेक्ष 227000 ने पहली डोज और 135000 ने दूसरी डोज लगवा ली है। 12 से 14 वर्ष के 155625 बच्चों में से 95000 ने पहली डोज और 3700 बच्चों ने दूसरी डोज लगवा ली है। टीकाकरण में सबसे अधिक सहयोग विद्यालयों का रहा, क्योंकि स्कूलों में बच्चे एक साथ मिल जाते हैं। वहीं एक-दूसरे को देखकर बच्चे टीका लगवा रहे हैं। इसी वजह से 05 से 12 वर्ष के बच्चों के टीकाकरण में स्कूल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- छोटे बच्चों का टीकाकरण जैसे ही प्रारंभ होगा, वैसे ही स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से स्कूलों में टीकाकरण सुनिश्चित कराएंगे। छोटे बच्चों को सुरक्षा के घेरे में लाना जरूरी है, क्योंकि उनके भविष्य के साथ ही देश का भविष्य जुड़ा हुआ है। - डॉ. धर्मेंद्र शर्मा, डीआईओएस।
- बेसिक स्कूलों में पांच से 12 साल तक के बच्चे मिल जाएंगे। इनका डाटा भी हमारे पास मौजूद है। छोटे बच्चों का टीकाकरण प्रारंभ होगा तो योजना बनाकर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करेंगे। शिक्षक और प्रधानाध्यापक अहम भूमिका निभाएंगे। -सतेंद्र कुमार, बीएसए।
- स्कूलों में सकारात्मक माहौल मिलता है। बच्चों के बीच एक दूसरे को देखकर प्रेरणा आती है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को लक्ष्य हासिल करने में सरलता रहती है। इसीलिए स्कूलों से टीकाकरण का ग्राफ बढ़ सकता है। - श्याम कुंतैल, प्रिंसिपल ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल।
- कोविध रोधी टीकाकरण का माहौल अस्पताल की जगह स्कूलों में ज्यादा अच्छा रहता है। खेल-खेल में एक दूसरी की होड़ के बीच बच्चे आसानी से टीका लगवा लेते हैं। छोटे बच्चों को शिक्षक ही संभाल सकते हैं। - हिमानी शमा, निवासी कलुवा।