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अलीगढ़ः अबकी बार घर-घर विराजेंगे ईको फ्रेंडली गणपति

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न्यायालय, एनजीटी और सरकार के आदेशों के क्रम में अब कारीगर भी ईको फ्रेंडली गणपति बप्पा की मूर्तियां बनाने लगे हैं। अब तक मिट्टी की मूर्तियां बनाने का कार्य छोटे स्तर पर होता था, जबकि इस बार दस फीट की मूर्तियां भी पीली मिट्टी, मुल्तानी मिट्टी, जूट और थोड़े पीओपी के मिश्रण से तैयार की जा रही हैं। मूर्ति बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि एक घंटे में पूरी मूर्ति पानी में घुल जाएगी।
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अलीगढ़ में तहसील कोल के बराबर वाले मैदान में मूर्ति बनाकर जगह-जगह बेचने वाले राजस्थान के राजसमंद जिले से आए कारीगरों ने बताया कि पीओपी की मूर्तियां लेने से कई लोगों ने पिछले सालों में मना कर दिया था। अधिकांश लोग मिट्टी से बने गणपति की प्रतिमा मांगते थे। ऐसे में इस बार थोड़ा पीओपी लेकर पीली मिट्टी, मुल्तानी मिट्टी और जूट के मिश्रण से मूर्तियां बना रहे हैं। जिनको अगर पानी में डाला जाए तो एक घंटे में मूर्तियां घुल जाएंगी। इससे जलीय जीवों को कोई नुकसान नहीं होगा।
101 रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक तैयार की हैं मूर्तियां
राजसमंद निवासी सोनू ने बताया कि उन्होंने 101 रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक की मूर्तियां बनाई हैं, जो एक फीट से लेकर दस फीट तक ऊंची हैं। उन्होंने बताया कि दस-दस फीट की कुल 90 मूर्तियां बनाई हैं, जिनमें से 20 मूर्तियों की बुकिंग हो गई है। इन मूर्तियों में लाल बाग के राजा, सिंहासन वाले गणपति, लेटे हुए गणपति, गद्दी वाले गणपति जैसी कई मूर्तियां शामिल हैं।
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2020 में नहीं हुआ था कामधंधा
-सोनू कारीगर ने बताया कि वह अपने भाई सुनील मोगिया के साथ में अलीगढ़ में पिछले 20 साल से मूर्तियों को बेचने का काम कर रहे हैं। अलग-अलग त्योहारों पर विभिन्न भगवानों की मूर्तियां बनाते हैं। पिछले साल 2020 में कामधंधा नहीं हुआ। इसी कारण इतने सालों में पहली बार अपने गांव में ही रहे। अलीगढ़ ही नहीं आए थे।
मिट्टी व अनाज से बनाई गई मूर्तियों का वितरण होगा नि:शुल्क
- गणेश चतुर्थी के मौके पर नौ सितंबर को जन जागरूकता के लिए समाजसेवी नि:शुल्क ईको फ्रेंडली गणपति प्रतिमा का अचलताल स्थित नटराज मंदिर में वितरण करेंगे। जिसके तहत मिट्टी और अनाज के मिश्रण से तैयार की गईं गणपति की प्रतिमाओं की पूजा से सुख-समृद्धि और विसर्जन से मछलियों को अनाज मिल जाएगा। बाबा बर्फानी भक्त मंडल के संरक्षक व कार्यक्रम संयोजक सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि आचार्य सुनील कौशल महाराज, ठा. श्योराज सिंह, यतेंद्र वार्ष्णेय वाईके, गौरव शर्मा, अमित भारद्वाज, मधुकर वार्ष्णेय, रितेश वर्मा के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। हम सभी को पर्यावरण संरक्षण के हित में ही धार्मिक त्योहार मनाने चाहिए।
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