सिर मुड़ाते ही ओला पड़ना बेशक मुहावरा हो, लेकिन यह हकीकत में तब बदल गया, जब अंग्रेजी शासन के अधीन 1803 में आते ही जिले ने भारी ओलावृष्टि देखी। इससे फसलों को काफी नुकसान हुआ था। रोचक बात यह भी थी कि इसी साल जिले में भीषण सूखे जैसे हालात देखे। बड़ी संख्या में तंग लोगों ने जिले से पलायन भी शुरू कर दिया था। मराठा सैनिकों और असंतुष्ट किसानों की ओर से भी लूटपाट की घटनाओं को अंजाम दिया गया। 1805-06 में भी बारिश ने शुरुआती दिनों में धोखा दिया। मध्य अगस्त में लोगों को बारिश के दर्शन हुए। 1813-14 में भी इसी तरह के हालात बने। 1819 में अलीगढ़ विषम हालात से उबर गया था।
1860 में पूरे जुलाई भर जिले में एक बूंद भी बारिश नहीं हुई
अंग्रेज बड़ी बेबाकी से लिखते हैं कि सूखे और अकाल जैसे हालात से निपटने के इंतजाम पुख्ता नहीं थे। 1860 में बारिश ने एक बार फिर गच्चा दिया था। पूरे जुलाई माह में जिले में एक बूंद बारिश के दर्शन नहीं हुए थे। 1860 में मानसून ने धोखा दे दिया था। अगस्त और सितंबर माह बिल्कुल सूखा गया। पहली बार अंग्रेजी शासन में राहत की व्यवस्था 1861 ईस्वीं में की गई थी। सबसे ज्यादा खराब स्थिति अतरौली तहसील की थी। 16455 लोगों को आर्थिक और अनाज की सहायता दी गई थी।
छोटे स्तर पर बेरोजगार मजदूरों के लिए राहत का कार्य शुरू किया गया। जुलाई 1861 तक 821856 लोगों की मदद पर 47504 रुपये खर्च किए गए थे। औसतन 5479 रुपये लगभग हर रोज राहत पर खर्च किए गए। इसका दो तिहाई भाग स्थानीय दानदाताओं और आगरा स्थित अंग्रेजों की गठित कमेटी ने मुहैया कराया था। इसके अलावा 30000 रुपये आगरा से अलीगढ़ में मदद के लिए दिए गए जो किसानों को बीज खरीदने और पशुपालन के मद में खर्च किए गए।
जारी...
स्रोत- अलीगढ़ का गजेटियर (1878-1909)