कोई हादसे का शिकार था तो किसी की सांसें उखड़ रही थीं। मरीजों को देखकर उनके तीमारदार डॉक्टरों के आगे गिड़गिड़ाने लगे। लेकिन डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि यहां इलाज नहीं मिलेगा कहीं दूसरी जगह ले जाओ। करीब 300 मरीजों को मेडिकल कालेज से लौटा दिया गया।
रात 8:30 बजे इमरजेंसी से जूनियर डॉक्टर उठकर चले गए, जिससे चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। मरीजों और तीमारदारों की बेचैनी बढ़ गई। इमरजेंसी के गेट के बाहर खड़े तीमारदार डॉक्टरों के आगे हाथ जोड़कर खड़े हो गए कि वह उनके मरीज को देख लें। लेकिन डॉक्टर नहीं रुके। हड़ताल के बाद सुरक्षाकर्मियों ने भी मरीजों को लौटाना शुरू कर दिया। सर्वाइकल की समस्या से जूझ रहीं जमालपुर की नूरजहां बिना इलाज कराए लौट गईं। एटा से आए शकूर अहमद सांस की समस्या से पीड़ित हैं। उनके परिजनों ने डॉक्टरों से देखने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसी तरह बाईखुर्द की रेखा भी बिना उपचार कराए लौट गईं। बलद और ताज मोहम्मद भी लौट गए, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है।
पांच महीने में तीसरी बार हुई हड़ताल
जेएन मेडिकल कॉलेज में पिछले पांच महीने में बृहस्पतिवार को तीसरी बार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर गए हैं। 13 जून की रात को मेडिकल कॉलेज में मरीज के तीमारदारों ने सुरक्षाकर्मियों से मारपीट की थी और जूनियर डॉक्टरों को जान से मारने की धमकी दे दी थी। इसके बाद 14 जून को जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। 22 अप्रैल को एएमयू में हॉर्स शो के दौरान हुई मारपीट की घटना में घायल एक व्यक्ति को जेएन मेडिकल कॉलेज लाया गया था। वहां कुछ लोगों ने इलाज कर रहे रेजीडेंट डॉक्टरों के साथ अभद्रता और फायरिंग कर दी थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएं बंद कर हड़ताल शुरू कर दी थी।
जूनियर डॉक्टरों की मांगें
- मेडिकल कॉलेज के प्रवेश प्वाइंट पर मेटल डिटेक्टर लगवाए जाएं, जिससे हथियार के साथ कोई व्यक्ति परिसर में प्रवेश न कर पाए
- इमरजेंसी के पास अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था रहे, ताकि मरीज के साथ अनावश्यक लोगों को अंदर प्रवेश करने से रोका जा सके।
- जिन लोगों ने डाॅक्टरों के साथ अभद्रता और फायरिंग की है, उनकी गिरफ्तारी हो और उनके खिलाफ कार्रवाई हो